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बाबा हरिहरनाथ मंदिर में वित्तीय वर्ष 25-26 में रुद्राभिषेक से ₹23.47 लाख की आय

मंदिर समिति द्वारा पारदर्शिता के लिए डिजिटल व्यवस्था पर जोर

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इसे लेकर बीते 20 अप्रैल को मंदिर न्यास समिति के पदाधिकारियों ने वर्षभर का लेखा-जोखा साझा किया, जिसमें मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और सुदृढ़ प्रबंधन की झलक देखने को मिली।

​रुद्राभिषेक बना आस्था और आय का मुख्य केंद्र

मंदिर न्यास समिति के आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक मंदिर में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में रुद्राभिषेक सबसे प्रमुख रहा। कुल 1,560 श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक कराया, जिससे मंदिर कोष में ₹23.47 लाख से अधिक का योगदान प्राप्त हुआ। संख्या की दृष्टि से साधारण पूजा (1,930) शीर्ष पर रही, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाती है।

बाबा हरिहरनाथ मंदिर ​न्यास समिति के आंकड़ों के अनुसार बाबा हरिहरनाथ मंदिर केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कारों का भी प्रमुख केंद्र है। यहां मुंडन संस्कार के तहत 1,434 बच्चों के उपनयन एवं मुंडन कार्य संपन्न कराये गये। 131 जोड़ों ने बाबा के सान्निध्य में विवाह बंधन में बंधकर दांपत्य जीवन की शुरुआत की। ​अन्य सेवाओं में किचन और देखा-सुनी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से समिति ने स्थानीय समाज को मांगलिक कार्यों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान किया।

पारदर्शिता और सुलभ प्रबंधन

मंदिर ​न्यास समिति के अध्यक्ष प्रमोद मुकेश, सचिव विजय कुमार सिंह लल्ला, सह-सचिव ओम प्रकाश सिंह, कोषाध्यक्ष निर्भय कुमार और सह-कोषाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिन्हा ने 22 अप्रैल को एक भेंट में बताया कि मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन अब पूर्णतः कंप्यूटराइज्ड है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रुद्राभिषेक और मुंडन जैसे शुल्कों में दक्षिणा को पहले से ही सम्मिलित रखा गया है, ताकि भक्तों को किसी प्रकार के मोलभाव का सामना न करना पड़े। कहा गया कि केवल यज्ञयोपवित् (जनेऊ) संस्कार ₹755/- में दक्षिणा अलग से देय है।

​समिति ने स्पष्ट किया कि मंदिर की आय के मुख्य स्रोत अनुष्ठान रसीदें और दानपात्र हैं। दान में प्राप्त राशि को उसी दिन बैंक में जमा कर दिया जाता है। मंदिर के खर्चों का प्रबंधन भी पूरी पारदर्शिता के साथ चेक या नेट बैंकिंग के माध्यम से किया जाता है, जिसमें ​कर्मचारी एवं रसोइया वेतन, स्टाफ और पंडितों का मानदेय, प्रतिदिन भोग-प्रसाद, श्रृंगार आरती, फूल-माला और साधु-संतों का सत्कार, यात्री निवास का संचालन, सफाई, बिजली बिल, प्लंबर और अन्य मेंटेनेंस के अलावा ​सामाजिक सरोकार से जुड़े प्रतिवर्ष निर्धन कन्याओं के विवाह में मंदिर द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
न्यास समिति ने कहा है कि श्रद्धालु भक्तों की सुविधा और बेहतर हो, इसके लिए हमेशा प्रयासरत है। कुछ दिनों के अंदर ही जूता स्टैंड, पैर हाथ धोने की व्यवस्था होने जा रहा है, जिसका कार्य आरंभ है।

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