रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड क्षेत्र के पंचायतो में स्थित मकानों पर नंबर प्लेट लगाने के नाम पर अवैध वसूली का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर प्रखंड प्रमुख नियोती कुमारी ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार कसमार प्रखंड में बीडीओ द्वारा जारी निर्देश के तहत सभी पंचायतों में सूचीबद्ध मकानों पर नंबर प्लेट लगाने का कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है। आरोप है कि एजेंसी द्वारा प्रति मकान 50 रुपये की वसूली की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष का माहौल है।
प्रखंड प्रमुख ने इस संबंध में उपायुक्त को पत्र लिखते हुए कहा है कि कई जगहों से शिकायत मिल रही है कि रहिवासियों से बिना स्पष्ट जानकारी के पैसे लिए जा रहे हैं। इससे आम जनता में भ्रम और नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कसमार प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मकानों पर नंबर प्लेट लगाने के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के नाम पर इस तरह की वसूली किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कहा कि यदि सरकार द्वारा कोई शुल्क निर्धारित है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी और पारदर्शिता जरूरी है। लेकिन वर्तमान में जिस तरीके से यह कार्य कराया जा रहा है, उसमें पारदर्शिता की कमी दिख रही है, जिससे आमजनों के बीच अविश्वास पैदा हो रहा है।
प्रमुख ने 19 अप्रैल को कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कहा कि यदि जांच में किसी पदाधिकारी, कर्मी या एजेंसी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा।
प्रशासनिक निर्देश के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों पर नंबर प्लेट लगाने का उद्देश्य स्वच्छता अभियान, जनगणना और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा प्रदान करना बताया गया है। इसके लिए प्रति मकान 50 रुपये शुल्क निर्धारित किए जाने की बात भी सामने आई है। अब इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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