एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी विजय शंकर नायक ने राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिकता पर तल्ख़ टिप्पणी की है।
नायक द्वारा बीते 19 अप्रैल को विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा बीते 17 अप्रैल को राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले में एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच की अनुमति देने का आदेश भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया सवाल बन गया है। यह मामला सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्वायत्तता, राजनीतिक प्रतिशोध और संस्थागत अखंडता का है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट, वर्ष 2025 में हाईकोर्ट और जनवरी 2026 में निचली अदालत द्वारा खारिज किए गए मामले को दोबारा खोलना क्या न्यायिक प्रक्रिया का विस्तार है या सत्ता के दबाव का परिणाम? नायक के अनुसार जब कोई नया तथ्य सामने नहीं आया, तो पुराने आरोपों को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य क्या है?
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का मूल सिद्धांत रेस ज्यूडिकाटा है। कहा कि एक ही मुद्दे पर बार-बार सुनवाई से बचना। यदि पहले सक्षम अदालतें आरोप निराधार मान चुकी हैं, तो पुनः जांच क्यों? यह सवाल हर सजग नागरिक पूछ रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कोई साधारण नेता नहीं। वे उस परिवार से हैं जिसने देश के लिए तीन पीढ़ियों का बलिदान दिया है।
कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 9 वर्ष जेल में काटे और लोकतंत्र की नींव रखी। इंदिरा गांधी ने देश की एकता के लिए प्राण त्यागे। राजीव गांधी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी। राहुल गांधी स्वयं भारत जोड़ो यात्रा (वर्ष 2022-23) और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के माध्यम से 14,000 किलोमीटर पैदल चले। लाखों देशवासियों से संवाद किया और सामाजिक न्याय की मांग उठाई। ऐसे व्यक्ति पर ब्रिटिश नागरिक का आरोप न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति का अपमान भी है।
नायक ने कहा कि असल सवाल यह है कि भाजपा को राहुल गांधी से इतना भय क्यों? क्या इसलिए कि वे जातीय जनगणना की मांग करते हैं, जो देश के 90 प्रतिशत आबादी को मुख्यधारा में लाने का माध्यम है? कहा कि राहुल गांधी बार-बार कहते हैं कि 10 प्रतिशत ऊपरी जातियां देश की संपत्ति, सेना, न्यायपालिका और मीडिया पर कब्जा जमाए बैठी हैं। आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। वर्ल्ड इनइक्वालिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी के पास कुल संपत्ति का 65 प्रतिशत है, जबकि शीर्ष 1 प्रतिशत के पास लगभग 40 प्रतिशत।
निचली 50 प्रतिशत आबादी के पास सिर्फ 15 प्रतिशत आय है। ऑक्सफैम रिपोर्ट्स में भी ऊपरी जातियों के पास 41 प्रतिशत संपत्ति और एससी-एसटी के पास 12 प्रतिशत से कम का उल्लेख है। ओबीसी, दलित और आदिवासी आबादी का बड़ा हिस्सा (लगभग 52 प्रतिशत ओबीसी) सरकारी नौकरियों, उच्च न्यायपालिका और सिविल सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व रखता है। सिविल सेवाओं में ओबीसी मात्र 15.92 प्रतिशत, एससी 7.65 प्रतिशत और एसटी के पास 3.8 प्रतिशत है। जबकि उनकी जनसंख्या अनुपात बहुत अधिक है।
नायक के अनुसार उच्च न्यायालयों में वर्ष 2018 के बाद नियुक्त 698 जजों में सिर्फ 22 एससी, 15 एसटी और 87 ओबीसी हैं। जिला अदालतों में एससी-एसटी-ओबीसी कुल 45.7 प्रतिशत हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में यह 20 प्रतिशत से नीचे है। जातीय जनगणना इन असमानताओं को उजागर कर नीतियां बनाने का आधार बनेगी, इसीलिए भाजपा इसे टाल रही है। राहुल की मांग सिर्फ जनगणना तक सीमित नहीं। वे कॉरपोरेट-सत्ता गठजोड़, बेरोजगारी और महंगाई पर सवाल उठाते हैं।
नायक ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत हो गई है, जबकि युवा (15-29 वर्ष) बेरोजगारी 15.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। सीएमआईई के अनुमानों में यह और अधिक है। किसान आत्महत्या, महिलाओं की असुरक्षा और अमीर-गरीब खाई बढ़ रही है। राहुल की मोहब्बत की राजनीति ध्रुवीकरण की भाजपा रणनीति के खिलाफ सीधा चुनौती है। भाजपा जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने की रणनीति पर चल रही है। उन्होंने कहा कि देश की संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में ईडी ने 193 राजनेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए, जिनमें सिर्फ 2 दोषसिद्धियां हुईं।
98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ थे। वर्ष 2019 से 2023 के बीच 95 प्रतिशत ईडी-सीबीआई मामले विपक्ष पर। भाजपा में शामिल होते ही मामले वॉशिंग मशीन से साफ हो जाते हैं। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन जैसे नेताओं पर कार्रवाई तेज, जबकि भाजपा नेताओं पर धीमी। यह वॉशिंग मशीन मॉडल अब जन मानस में धारणा बन चुकी है। यह विवाद भाजपा के विरोधाभास को भी उजागर करता है। एक ओर परिवारवाद का विरोध, दूसरी ओर कई राज्यों में सत्ता परिवार आधारित (योगी, शाह परिवार प्रभाव आदि)। कहा कि राष्ट्रवाद का प्रमाण पत्र बांटते हुए गांधी परिवार जिसने रक्त दिया को विदेशी करार देना राष्ट्रीय अपमान है।
नायक के अनुसार वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में भारत जोड़ो यात्रा प्रभावित 56 सीटों पर कांग्रेस का वोट शेयर औसतन 6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कुल वोट शेयर में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यात्रा ने युवा और वंचित वर्गों में संवाद स्थापित किया, जो भाजपा के लिए असहज था। यह सिर्फ राहुल की लड़ाई नहीं, लोकतांत्रिक असहमति की लड़ाई है। यदि प्रमुख विपक्षी नेता पर निराधार आरोपों से घेरा जाए, तो संदेश साफ है। सत्ता से सवाल पूछो, तो दंड मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का स्तंभ है, लेकिन पूर्व खारिज मामलों को पुनः खोलना संसाधनों का दुरुपयोग और कार्यपालिका-न्यायपालिका संबंधों पर सवाल खड़ा करता है।
नायक के अनुसार यह वास्तविक मुद्दे बेरोजगारी, किसान संकट, सामाजिक न्याय से ध्यान भटकाने की डायवर्जन पॉलिटिक्स है। कहा कि राहुल गांधी ने संविधान, सामाजिक न्याय और विविधता की रक्षा की भाषा को पुनर्जीवित किया। इतिहास गवाह है विचारों को मुकदमों से नहीं दबाया जा सकता। भाजपा को समझना चाहिए कि राजनीतिक लड़ाई मैदान में लड़ी जाए, एजेंसियों से नहीं। जनता ने आपातकाल देखा, दमन देखा और हर बार लोकतंत्र बचाया।
आज भी जनता न्याय के साथ खड़ी है। अंततः सत्य की जीत होगी। यह मामला भाजपा की नैतिक हार साबित हो सकता है। नायक ने कहा कि राहुल गांधी पर हमला दरअसल संविधान और सामाजिक न्याय के विचार पर हमला है। कहा कि लोकतंत्र विपक्ष से जीवित रहता है। झूठ का शोर थमेगा, सच बचेगा और इतिहास दर्ज करेगा कि भारत की आत्मा के पक्ष में कुछ आवाजें डटी रही।
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