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नहर परियोजना कार्य में किसानों का शोषण बंद हो-किसान महासभा

पेड़-पौधे पर मालगुजारी रसीद कटाने वाले किसान

एस.पी.सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। तिरहुत गंडक नहर परियोजना के ठेकेदारों द्वारा पेड़- पौधे को काटकर ले जाने के खिलाफ मालगुजारी टैक्स एवं डाक लेने वाले किसानों को हक- अधिकार देने को लेकर 24 जनवरी को समस्तीपुर जिला (Samastipur district) के हद में फतेहपुर ठुठ्ठा बर के पास किसानों ने बैठक के बाद जमकर प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम (Program) में बतौर अतिथि भाकपा माले (Bhakpa male) ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, ऐपवा जिला अध्यक्ष बंदना सिंह समेत अन्य माले एवं किसान महासभा के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर मनोज कुमार, लाला सिंह, संजीत कुमार, लक्ष्मण सिंह, सुलेखा कुमारी, सूर्यदेव सिंह, प्रेम कुमार वर्मा, सुरेश प्रसाद सिंह, राजू कुमार, भरत सिंह, रत्नेश कुमार, पिंकी देवी, अमृता कुमारी, इंदू देवी, अरुण कुमार पंडित, अजय कुमार पंडित आदि किसान उपस्थित थे।

किसानों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार जबरदस्ती हजारों पेड़- पौधे काटकर दलाल- माफिया, आरा मिल संचालक आदि के हाथों बेचा जा रहा है। जमीन मापी में किसानों को नहीं रखा जा रहा है।

भूमि अधिग्रहण किया गया रकवा के अनुसार और मापी कर लिया जा रहा है। नक्शा के अनुसार, जो गलत है। कार्यस्थल पर योजना का बोर्ड भी नहीं लगाया जा रहा है। किसानों के शक को दूर करने के लिए अधिग्रहण से संबंधित कोई कागजात भी नहीं दिखाया जा रहा है।

पंचायत को संबोधित करते हुए भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि विभाग जान बूझकर ठेकेदारों से किसानों को उलझा रही है।

जो किसान अभी तक मालगुजारी रसीद कटाते रहे हैं, जो इस जमीन पर फसल, पेड़, पौधे लगाते रहे हैं, कायदे से उन्हीं किसान का उक्त फसल, पेड़, पौधे पर हक- अधिकार होना चाहिए। इसे लेकर आगामी 30 जनवरी को किसान महासभा के बैनर तले किसान महापंचायत बुलाने की घोषणा की गई। इसे जिले के कई नहर आंदोलन के अनुभवी नेता संबोधित करेंगे।

किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि नहर का कार्य कायदे से एक किनारे से होना चाहिए, जबकी इसे साजिश के तहत सरकारी राशि बंदरबांट के लिए मुजफ्फरपुर, पूसा आदि को छोड़कर ताजपुर के अंतिम छोड़ चकहैदर, फतेहपुर में मनमाने रूप से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने उक्त मामले में न्यायालय के फैसला आने तक कार्य बंद करने की मांग की है।

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