अस्सी बच्चों के समूह ने दिखाई संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक झांकी
गणतंत्र दिवस लोकतंत्र गणतंत्र के उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए-महाप्रबंधक
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में आन-बान-शान से 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम एवं हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। समारोह में विद्यालय के अस्सी बच्चों के समूह ने अलग अलग देश के सभी राज्यों की सांस्कृतिक झांकी प्रस्तुत की।
गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि सीसीएल कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक सह-स्थानीय विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष संजय कुमार, विशिष्ट अतिथियों में महाप्रबंधक की धर्मपत्नी इंदु कुमारी, स्वांग-गोबिंदपुर फेज दो के परियोजना पदाधिकारी अनिल कुमार तिवारी, कथारा कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी रंजीत कुमार, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ नेता वरुण कुमार सिंह आदि उपस्थित थे। अन्य गणमान्य अतिथियों में क्षेत्र के समाजसेवी मोहम्मद फारूक, एनजीओ संचालिका सुनीता सिंह, मनोज राय आदि शामिल थे।
समारोह के प्रारंभ में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण किया, जिसमें विद्यालय के चारों सदनों यथा दयानंद, अरविंदो, विवेकानंद एवं श्रद्धानंद के विद्यार्थी शामिल थे। इस दौरान पूरा विद्यालय प्रांगण सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा के स्वरों से गुंजायमान था। मुख्य अतिथि ने झंडोत्तोलन कर राष्ट्र ध्वज को सलामी दी। विद्यालय के चारों सदनों के विद्यार्थियों ने कदम से कदम मिलाते हुए मनमोहक परेड कर झंडे को सलामी दी।
मौके पर विद्यालय परिसर में एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चला। जिसमें विद्यार्थियों ने देश की अनेकता में एकता को दर्शाते हुए विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। यहां गुजरात, बंगाल, बिहार, झारखंड, पंजाब, कर्नाटक आदि राज्यों का लोकनृत्य शामिल थे। नृत्य के समापन पर सभी ने वंदे मातरम की धुन पर एकत्रित होकर देश की शक्ति को दर्शाया।
इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका सुरभि दुबे एवं मानसी सिन्हा ने इस मनमोहक नृत्य का निर्देशन किया। विद्यालय के जूनियर विंग के नन्हे मुन्नों ने ओ माय फ्रेंड गणेशा पर नृत्य कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। संदेशे आते हैं, मेड इन इंडिया, लाठी पकड़े ऐनक पहने आदि देशभक्ति गीतों पर एक से बढ़कर एक समूह नृत्य प्रस्तुत किए गए। देशभक्ति की भावना से लबरेज दो अति सुंदर कर्ण प्रिय देश भक्ति समूह गीतों की भी प्रस्तुति की गई, जिनके बोल मेरा रंग दे बसंती चोला तथा आएगा वह दिन आएगा थे। कार्यक्रम में एक देशभक्ति नाटक की भी प्रस्तुति की गई।
नाटक में दर्शाया गया कि जब कोई शहीद तिरंगे में लिपटा अपने घर आता है तो उसके परिवार वाले उसकी देशभक्ति पर फक्र करते हैं और शान से कहते हैं कि हम भारतीय हैं। नाटक के उक्त दृश्य ने उपस्थित जनसमूह को अत्यंत भावुक कर दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महाप्रबंधक संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गणतंत्र का यह महापर्व हमें देशभक्ति का संदेश देता है। उन्होंने संविधान निर्माता एवं संविधान समिति को नमन किया। महाप्रबंधक ने कहा कि देश का संविधान हमें अधिकार तो देता ही है साथ ही साथ कुछ कर्तव्य भी देता है, जिनका हमें पूरी निष्ठा के साथ पालन करना चाहिए। तभी हमारा लोकतंत्र सफल साबित होगा।

उन्होंने विद्यालय की उपलब्धियों पर भी चर्चा की और कहा कि विद्यालय पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अपने आप को सर्वश्रेष्ठ साबित करता रहा है। इसका श्रेय विद्यालय के बोनाफाइट प्राचार्य डॉ जी. एन. खान तथा यहां के तमाम शिक्षकों को जाता है।अभिभावकों को भी गर्व होना चाहिए कि उनके बच्चे एक ऐसे विद्यालय में अध्यनरत हैं जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर शत प्रतिशत ध्यान केंद्रित करता है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि स्वांग-गोबिंदपुर फेज दो के परियोजना पदाधिकारी अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति नाटक अत्यंत सराहनीय था। इसके मार्मिक दृश्यों ने उनकी आंखें नम कर दीं। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर, सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया एवं कहा कि यह उनके बलिदानों का ही फल है कि आज हम एक स्वतंत्र और गणतंत्र देश के रहिवासी हैं।
समारोह में विद्यालय के प्राचार्य सह-झारखंड जोन -आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ जी. एन. खान ने कहा कि हमारे इस महान भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 3 वर्ष की अवधि लगी। यह संविधान 26 नवंबर 1949 में ही पूर्ण हो चुका था, लेकिन इसे लागू करने के लिए 2 महीने की प्रतीक्षा की गई। इसके पीछे भी एक ऐतिहासिक कारण था। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 1929 को रावी नदी के किनारे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर सेशन आयोजित किया गया, जिसके सभापति पंडित नेहरू थे। इस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित किया गया की 26 जनवरी 1930 को हम पूर्ण स्वराज मनाएंगे और तिरंगा फहराएंगे। इसी प्रस्ताव को सम्मान देने के लिए हमारा भारतीय संविधान 26 जनवरी के दिन 1950 में लागू किया गया।
प्राचार्य डॉ खान ने कहा कि सही अर्थों में हमारा गणतंत्र तभी सफल होगा, जब हम संविधान में वर्णित अपने कर्तव्यों का अक्षरशः पालन करेंगे। उन्होंने इस पुनीत दिवस पर सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक जितेंद्र दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समस्त कार्यक्रम को सफल बनाने में पंकज कुमार, नागेंद्र प्रसाद, डॉ आर एस मिश्रा, टी.एम. पाठक, ए.के. गोस्वामी, रंजीत कुमार सिंह, बी.के. दसौंधी, रितेश कुमार, राकेश रंजन, संजय महतो, शिव प्रकाश सिंह, राहुल कुमार, रेखा कुमारी, वीणा कुमारी, आराधना, मधुमल्लिका उपाध्याय, रंजीता सिंह, खुशबू कुमारी, रिया सरकार, रिया सिन्हा, कुमारी ज्योति, पूजा सिंह, सुमन कुमारी, ममता पात्रा,ओशीन, अर्शिया एजाज, बबली कुमारी, संगीत कुमार, जयप्रकाश गिरि, प्रेम कुमार तिवारी सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार की सराहनीय भूमिका रही।
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