अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले के विभिन्न घोड़ा बाजारों में बीते 3 नवंबर को तीन दर्जन से अधिक घोड़ों का आगमन देखा गया। यहां के घोड़ा बाजारों के प्रांगण को सुखाने के लिए जमीन मालिकों द्वारा निरंतर प्रयास अब भी जारी है।
जानकारी के अनुसार यहां के सरकारी लोअर बैलहट्टा के बाद अगर सबसे ज्यादा क्षेत्र में कोई मेला लगता है तो वह घोड़ा बाजार का विस्तृत इलाका है। इस घोड़ा बाजार के अलग – अलग मालिक हैं और उनकी जमीनों में और उन्हीं के संरक्षण में घोड़ा बाजार लगता है। अभी घोड़ा बाजार में जाने के कई रास्ते कीचड़नुमा हैं लेकिन आने -जाने वाले यात्री अपने पैरों से मथकर मिट्टी को सूखा दे रहे हैं। घुड़दौड़ लायक अभी जमीन तो है ही नहीं।
सरकारी शुल्क मुक्त पर घट रही हर साल बैलों की उपस्थिति व् आमद
सोनपुर मेला का लोअर बैलहट्टा सरकारी शुल्क मुक्त किया जा चुका है। पर हर साल बैलों की यहां उपस्थिति व् आमद में गिरावट होती जा रही है। देवोत्थान एकादशी के तीसरे दिन बीते 3 नवंबर को इस मेले में महज एक दर्जन बैल पहुंच पाए हैं। जबकि इसका इतिहास है कि देवोत्थान से ही इस बैल बाजार की रौनक बढ़ जाती थी। इसकी खरीद बिक्री शुरू हो जाती थी। सरकारी तौर पर मेला उद्घाटन से इस सरकारी बैल बाजार का कोई लेना -देना नहीं रहता था। कभी यह बैल बाजार बिहार भर के किसानों के लिए बैलों के खरीद -बिक्री का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। अभी तक लोअर बैलहट्टा में कहीं भी साफ -सफाई शुरू नहीं की गयी है। बैलहट्टा में जाने के लिए एक मात्र मार्ग है जो आज तक की स्थिति में क्षतिग्रस्त है। घुड़दौड़ मंच तक ले जानेवाली ईंट सोलिंग सड़क जंगलों से पटा पड़ा है। निकट ही शौचालयों का निर्माण हो रहा है। सीटें बैठा दी गई हैं ।
सोनपुर के मही नदी के उत्तरी किनारे स्थित इस बैलहट्टा की मिट्टी अभी तक गीली है और किनारे पर जल -जमाव है। अभी मही नदी में लबालब पानी भरा है। नाव का परिचालन हो रहा है। सारण जिला प्रशासन को मुख्य सड़क से बैल बाजार में बैलों को ले जाने के लिए कई स्थानों पर मिट्टी भरकर सड़कों का निर्माण करना जरूरी है। क्योंकि, सड़क किनारे अभी भी मही नदी के बाढ़ के पानी का जल जमाव है। जहां पानी सुख चुका है, वहां से सड़कें निकाली जा सकती हैं।
लालू प्रसाद यादव ने किया था सरकारी बैल बाजार को शुल्क मुक्त
सोनपुर मेला वर्ष 1995 के 6 नवंबर को उद्घाटन समारोह के अवसर पर मेला के मुख्य जन सम्पर्क पंडाल के मंच पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने पशुओं की खरीद-बिक्री शुल्क मुक्त कर दिया था। यह आदेश उसी वर्ष से लागू हो गया। तब लोअर बैलहट्टा की बंदोबस्ती रद्द कर जमा की गई राशि ठेकेदारों को वापस करनी पड़ी थी। तब से लोअर बैलहट्टा में पशुओं के खरीद -बिक्री को शुल्क से मुक्त कर दिया गया था।
इस बावत किसान नेता ब्रज किशोर शर्मा बताते हैं कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधारित कृषि ने परम्परागत खेती के तौर तरीकों को प्रभावित किया है। ट्रैक्टर से खेतों की जुताई होने से मेले मे बैलों की आमद कम होती चली गई। किसानों के दरवाजे से बैल गायब होते चले गए। अब इस बैल बाजार में बैलों की आमद बहुत कम हो चुकी है। विदित हो कि सोनपुर मेला का बैल बाजार दो भागों में विभक्त है। सरकारी लोअर बैलहट्टा और अपर बैलहट्टा। अपर बैलहट्टा सोनपुर गांव में निजी जमीनों में लगता है, जिसके संरक्षक जमीन मालिक होते हैं। जबकि लोअर बैलहट्टा पूरी तरह से सरकारी नियंत्राधीन है।
सच कहिए तो कभी यह लोअर बैलहट्टा देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी बैल बाजार हुआ करता था, जो मही नदी किनारे हरिहरनाथ -पहलेजा निचली पथ के दक्षिणी किनारे 52 बीघा में फैला है। लोअर बैलहट्टा में एडवेंचर स्पोर्ट्स के साथ – साथ हॉट एयर बैलून का शो भी आयोजित होता है। मेला यात्री इस हॉट एयर बैलून की सवारी कर गगन यान की तरह सवारी का लुत्फ उठाते हैं।
यहां घुड़दौड़ का भी आयोजन होता रहा है, जिसके लिए सड़क बनाई गई थी और मंच भी बना था। इस बार भी जिला प्रशासन की घुड़दौड़ के आयोजन की घोषणा है। यहीं पर कई बार एयर एडवेंचर स्पोर्ट्स के तहत निशानेबाजी का खेल भी मेला दर्शकों ने देखा है। युवाओं ने तीरंदाजी पर भी हाथ आजमाया है। अमरनाथ मूर्ति के समीप से बैलहट्टा में घुसने वाले रास्ते पर अभी पानी है। यह सबसे पुराना मार्ग है जो पूर्णतः बदहाल है। इस बार छठ पूजा में भी यहां के सड़क को नहीं भरा गया।
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