प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा की तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व है।
शास्त्रों के अनुसार माता का दिव्य स्वरूप, मस्तक पर अर्धचंद्राकार घंटा और दस हाथों में धारण किये गए देवताओं के अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित, भक्तों के लिए साहस, विजय और पराक्रम का प्रतीक है।इस दिन मां चंद्रघंटा की आराधना करने से न सिर्फ मनोबल बढ़ता है, बल्कि जीवन की हरेक बाधाओं एवं संकटों का भी नाश होता है।
बता दें कि, बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली के मंडपवारी चौक स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में आचार्य संतोष चटर्जी द्वारा 24 सितंबर को दुर्गा सप्तशती पाठ किए जाने के उपरांत संध्या को मां की सामूहिक आरती उपरांत देर रात तक गांव की श्रद्धालु माताओं द्वारा माता गीत तथा स्थानीय संकीर्तन मंडली द्वारा धार्मिक भजन प्रस्तुत किए गये।
इस अवसर पर संध्या आरती के दौरान श्रद्धालुओं में मुखिया धर्मेंद्र कपरदार, पूर्व मुखिया पति गौरीनाथ कपरदार, रहिवासी संतोष नायक, संजय कपरदार, संजय मिश्रा, संतन मिश्रा, मंटू मिश्रा, बैजनाथ नायक, बैजनाथ पॉल, राम कपरदार, मथुर साव, महावीर पॉल, रामू यादव, सोनू यादव, चौकीदार रजवार, दामु मिश्रा, गोपाल दत्त, मनी मिश्रा, प्रकाश मिश्रा, सौरव मिश्रा, झूलन मिश्रा, चंचल जायसवाल सहित दर्जनों युवक, युवती, बच्चे आदि उपस्थित थे।
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