रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड के प्रचलित भाषा खोरठा के प्रसिद्ध गायक, गीतकार, लेखक, समीक्षक एवं दिव्य विभूति सुकुमार विश्वकर्मा के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर व्याप्त है। उनके उच्चतर योगदान की चारों तरफ चर्चा हो रही है।
श्रेष्ठ रचनाकार के निधन पर झारखंड +2 शिक्षक संघ बोकारो ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। संघ के जिलाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने सुकुमार को महान साहित्यकार के रूप में याद करते हुए कहा कि उनकी कृतियां आने वाली तमाम पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
जिला सचिव डॉ अवनीश कुमार झा ने विश्वकर्मा द्वारा गाए गीत भासाक मान जाने नांय, दुखें तोर, आंखें लोर, ऐलो मास्टर, तू जो स्कूलवा, हर जोतै खेढ़वा कुकुर बुने धान रे एवं आगु करम आपन देश, हमिन हकी झारखंडक वासी जैसे अमर गीतों के लिए दिवंगत विश्वकर्मा को याद किया। संरक्षक डॉ अजय कुमार पाठक ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कुशल संप्रेषण क्षमता के लिए नमन किया।
दिवंगत विश्वकर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में राजेश कुमार विश्वकर्मा, मृत्युंजय कुमार, धनंजय कुमार,भरत कुमार महतो, मुकेश कुमार यादव, रोहित कुमार, दिनेश चंद्र, देवेन्द्र कुमार मेहता, डॉ रणजीत कुमार झा, चंद्र भूषण पांडेय, मो. इरशाद अख्तर, ब्रिजेश त्रिपाठी, संतोष कुमार सिंह, रबिंता कुमारी, ज्योति तिग्गा, तुलेश्वर प्रसाद मेहता, दीपक कुमार महथा, धनीराम बेदिया समेत बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिका शामिल थे।
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