एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना की सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार के सौजन्य से 28 से 30 मई तक प्रतिदिन संध्या 7 बजे से 3 दिवसीय दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन सारण जिला के हद में मशरख प्रखंड के ग्राम सेरुकहाँ में आयोजित हो रहा है।
कलाकार साझा संघ के सचिव प्रसिद्ध टीवी कलाकार मनीष महीवाल ने जानकारी देते हुए 29 मई को बताया कि राजधानी पटना की अन्य संस्थाएं केवल पटना शहर में ही नाटकों का प्रदर्शन करती हैं, वही लोक पंच द्वारा विगत 9 वर्षों से बिहार के विभिन्न जिलों के ग्रामों में नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नाट्य कला उन जगहों तक पहुच सके, जहाँ के रहिवासी इससे भली भांति परिचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा महोत्सव के दूसरे दिन 29 मई को रासलीला मंडल मथुरा (उत्तर प्रदेश) द्वारा स्वामीश्री वेदव्यास द्वारा लिखित एवं पंडित संतोष पचौरी द्वारा निर्देशित नाटक रासलीला की प्रस्तुति की गयी।
महीवाल ने बताया कि नाटक रासलीला के कथासार के अनुसार कुंडलपुर नरेश महाराज भीष्मक भगवान कृष्ण के साथ अपनी पुत्री रुक्मणी का विवाह करना चाहते हैं, लेकिन उनका पुत्र रुक्मी अपनी बहन रुक्मणी का विवाह चंदेली के महाराज दमघोष के पुत्र शिशुपाल से करना चाहता है।

महाराज भीष्मक भगवान द्वारकाधीश के लिए लगन टीका भेज देता है और पिता की बात ना मानते हुए युवराज रुक्मी शिशुपाल के लिए लगन टीका भेज देता है। भगवान कृष्ण कुंडलपुर आते हैं और रुक्मणी का मंदिर से हरण कर ले जाते है। जब शिशुपाल को यह बात पता चलती है तो वह युद्ध करने जाता है। शिशुपाल भगवान कृष्ण की बुआ का पुत्र था, इसीलिए भगवान उसकी सौ गाली माफ कर देते हैं, लेकिन सौ से ज्यादा होने पर सुदर्शन चक्र धारण करते हैं। शिशुपाल वहां से भाग खड़ा होता है।
कथासार के अनुसार प्रस्तुत नाटक में फिर जब रुक्मी भगवान से युद्ध करने लगता है तो श्रीकृष्ण उसे बंदी बना लेते है और रुक्मणी के कहने पर उसके प्राण बख्श देते हैं। नाटक में कृष्ण का किरदार सचिन भारद्वाज, राधा का नंदिनी मिश्रा, गोपी का सानिया शर्मा, हेमंत पांडेय, पीयूष शर्मा , कंस का गोपाल दास, जोकर का रामदास, अग्रसेन महाराज का शत्रुगन दास ने निभाया। नाटक के दौरान गायक मोनू दास ने गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
इस अवसर पर जय आकृति संस्था द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गई, जिसे ग्रामीणों ने भरपूर सराहा। महीवाल के अनुसार कार्यक्रम समापन पर 30 मई को लोक पंच एवं रंग रूप वैशाली द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
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