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दावे हवाई, हकीकत जुदा: पेयजल मंत्री के क्षेत्र में प्यासा है पूर्व विधायक का पैतृक गांव

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड सरकार के विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावों की हकीकत बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड से खुलकर सामने आ रही है। प्रखंड के हद में मुरहुलसुदी पंचायत के पाड़ी गांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि योजनाएं कागजों पर चाहे जितनी मजबूत दिखें, ज़मीनी सच्चाई कितनी कमजोर है।

यह वही गांव है, जो गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो का पैतृक गांव भी बताया जाता है। विडंबना यह कि आज इस गांव के रहिवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि वर्तमान में गोमिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेन्द्र प्रसाद महतो राज्य के पेयजल विभाग के मंत्री हैं।

जल संकट से जूझता गांव, योजनाएं बनी शो-पीस

बताया जाता है कि कसमार प्रखंड के हद में मुरहुलसुदी पंचायत के पाढ़ी गांव में हालात इतने खराब हैं कि सरकारी योजनाओं के बावजूद पेयजल संकट गहराता जा रहा है। यहां लगे जलमीनार शो-पीस बनकर रह गया है। सरकार की महत्वाकांक्षी जलमीनार योजना यहां पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है। पाइपलाइन बिछी है, लेकिन अधिकांश घरों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो रही हैं। गांव का चापाकल मरम्मत के अभाव में खराब है। गांव के कई सरकारी चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं। मरम्मत के लिए न तो कोई ठोस पहल दिख रही है और न ही प्रशासनिक सक्रियता।

सोलर मशीन गायब होने का आरोप

ग्रामीण रहिवासियों का कहना है कि वार्ड सदस्य के घर के सामने लगे एक चापाकल का सोलर मशीन भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई है, जिससे योजना पर और सवाल खड़े हो गए हैं। जल संकट से परेशान ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ किसी व्यक्ति या राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का सवाल है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ शब्दों में कहा है कि राजनीति छोड़िए और हमारी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दीजिए। हमें सिर्फ पानी चाहिए। पाड़ी गांव की स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब मंत्री के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट इतना गंभीर है, तो राज्य के अन्य ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी, इसका स्वतः अंदाजा लगाया जा सकता है।

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