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वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी-दशई चौधरी

​बाबू शिवजी राय स्मृति सेमिनार में शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने की चेतावनी

​अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के निकटवर्ती वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के हद में सिनेमा रोड स्थित बाबू शिवजी राय मेमोरियल लाइब्रेरी सभाकक्ष में बीते 21 अप्रैल को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

जानकारी के अनुसार शिक्षाविद् और जननेता बाबू शिवजी राय की स्मृति में वैश्विक चुनौतियां और हमारी शिक्षा व्यवस्था विषय पर एक दिवसीय सेमिनार और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

​सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री दशई चौधरी ने बाबू शिवजी राय को एक क्रांतिकारी और वंचित समाज के अधिकारों के लिए लड़ने वाला समन्वयवादी नेता बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है और नई चुनौतियों से निपटने के लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में साइंटिफिक टेम्परामेंट (वैज्ञानिक दृष्टिकोण) को बढ़ावा देना अनिवार्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वश्रेष्ठ छात्रों को बेहतर वेतन और सुविधाओं के साथ शिक्षण कार्य से जोड़ना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

सेमिनार में वरिष्ठ लेखक और पत्रकार सुरेंद्र मानपुरी ने दुनिया में बढ़ते लोकतांत्रिक अधिनायकवाद पर चिंता जताते हुए कहा कि मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए शिक्षा पद्धति में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। वहीं, डॉ दामोदर प्रसाद सिंह ने कहा कि बिना उच्च मानक वाले गुरुओं के निर्माण के राष्ट्र का विश्व गुरु बनना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से शिक्षा बजट बढ़ाने और प्रशिक्षण पर निवेश करने की अपील की।

सेमिनार में राजेंद्र राय, ब्रजभूषण राय और शिव बालक राय प्रभाकर जैसे शिक्षाविदों ने शिक्षण संस्थानों के गिरते स्तर और नई शिक्षा नीति के कुछ पहलुओं पर असंतोष व्यक्त किया। समाजवादी नेता राजेश कुमार शर्मा और वामपंथी नेता मनोज भूषण ने एक देश-एक शिक्षा नीति की वकालत करते हुए शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को जनविरोधी करार दिया।

​काव्य धारा में बही बज्जिका और हिंदी की त्रिवेणी

सेमिनार के पश्चात कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन उमेश कुमार निराला और अध्यक्षता बज्जिका भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार अखौरी चंद्रशेखर ने की। इस सत्र में डॉ महेंद्र प्रियदर्शी ने देशभक्ति की कविताएं, नंदेश सिंह नंदू ने किसान-मजदूरों के संघर्ष के गीत और वरिष्ठ कवि नंदेश्वर प्रसाद सिंह ने व्यवस्था पर तीखे व्यंग्य बाण छोड़े।

कवि विजय कुमार विनीत और अखौरी चंद्रशेखर ने बज्जिका गीतों से ग्रामीण परिवेश को जीवंत कर दिया, वहीं आशुतोष कुमार सिंह व नवल किशोर सुमन ने समसामयिक चुनौतियों और जीवन के मर्म को अपनी गजलों और गीतों के माध्यम से साझा किया। कार्यक्रम का विषय-प्रवेश संस्थापक कुमार वीर भूषण ने किया। इस अवसर पर दिशा श्रीवास्तव, संजय दास, राजेश पाराशर, कर्नल कुमार सहित नगर के कई गणमान्य साहित्य प्रेमी और रंगकर्मी उपस्थित थे।

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