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जाति, लिंग और राजनीति में उलझे रहे, तो प्रकृति का विनाश तय-बबलू आनंद महतो

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। मानव समाज आज असली मुद्दों से भटकता जा रहा है। जाति, लिंग और राजनीति के नाम पर बढ़ते विभाजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण विषय प्रकृति और पर्यावरण लगातार उपेक्षित हो रहा है।

उक्त चिंता व्यक्त करते हुए प्राकृतिक रक्षण के संस्थापक और प्रखर पर्यावरण कार्यकर्ता बबलू आनंद महतो ने समाज को गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने 21 मार्च को एक भेंट में कहा कि आज आमजन आपसी मतभेदों और राजनीतिक बहसों में इतने उलझ गए हैं कि पर्यावरण जैसे जीवन के आधार को ही नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया तथा कहा कि अगर कल पर्यावरण ही नहीं बचेगा, तो इंसान कैसे बचेगा? जब इंसान ही नहीं रहेगा, तो इन बँटवारों का क्या मतलब रह जाएगा?

जमीन पर दिख रहे हैं खतरे के संकेत

पर्यावरणविद् बबलू आनंद महतो ने कहा कि यह केवल सैद्धांतिक चिंता नहीं, बल्कि हकीकत है जो आज हर जगह दिखाई दे रही है। कहा कि झारखंड के कई इलाकों में रहिवासी पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं। शहरों में स्वच्छ हवा के लिए मास्क पहनना आम होता जा रहा है। कहा कि हर साल गर्मी नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। अस्पतालों में सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ये सब घटनाएं महज खबर नहीं, बल्कि आने वाले बड़े संकट की चेतावनी हैं। आज छोटी लापरवाहियां बड़ा खतरा बन रही है। उन्होंने आमजनों की रोजमर्रा की आदतों पर भी चिंता जताई। कहा कि कचरा इधर-उधर फेंकना, पानी की बर्बादी करना और पेड़ों की अनदेखी करना आज आम हो गया है, जबकि यही छोटी-छोटी लापरवाहियां मिलकर बड़े पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही हैं।

बबलू ने कहा कि प्रकृति अब केवल संकेत नहीं दे रही, बल्कि अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर चुकी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते इंसान नहीं संभला, तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कई प्रजातियां समय के साथ समाप्त हो चुकी हैं और अगर इंसान ने अभी भी नहीं सीखा, तो मानव समाज भी गंभीर संकट में पड़ सकता है। उन्होंने समाज से आत्ममंथन करने की अपील की तथा सवालिया लहजे में कहा कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं?

क्या हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य छोड़ रहे हैं? उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और पर्यावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि पहले प्रकृति, तभी जीवन की सोच के साथ आगे बढ़ना ही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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