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केबी कॉलेज बेरमो में दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में जारंगडीह स्थित के. बी. कॉलेज बेरमो में कॉलेज प्रबंधन एवं झारखंड काउंसिल ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड इन्नोवेशन, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में स्टेट ऑफ एन्वायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज: चैलेंज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया गया।

उद्घाटन सत्र में केबी कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मी नारायण, मुख्य अतिथि प्रेसिडेंसी कॉलेज कोलकाता के डॉ कौशिक प्रमाणिक, जर्नल सचिव डॉ मौसमि रॉय, पूर्व प्राचार्य बीडीए कॉलेज पिछरी रविंद्र कुमार सिंह, बीडीए कॉलेज के प्राचार्य डॉ जितेंद्र प्रसाद, केबी कॉलेज के प्रोफेसर इंचार्ज गोपाल प्रजापति, कन्वेनर डॉ अरुण कुमार रॉय महतो, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी हजारीबाग यू सेट विभाग के हेड डॉ ख़ेम लाल महतो आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिसमे सभी उपरोक्त मंचासीन उपस्थित रहे। मौके पर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। छात्रा प्रियंका कुमारी ने स्वागत नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य लक्ष्मी नारायण ने अध्यक्षकीय भाषण दिया। विषय प्रवेश कन्वेनर डॉ अरुण कुमार रॉय महतो ने किया। मंच पर बैठे अतिथियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस स्मारिका का विमोचन किया।

इस अवसर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि डॉ कौशिक प्रमाणिक ने कहा कि प्रकृति की रक्षा हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इसमें कोई विकल्प नहीं है। डॉ मौसमि रॉय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आने वाली पीढ़ीयों के प्रति हमारा साझा दायित्व है। प्राचार्य सह नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी नारायण ने कहा कि एक कदम प्रकृति की ओर, एक संकल्प बेहतर कल के लिए तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को राष्ट्र सेवा के रूप में देखने की जरूरत है।

इस अवसर पर कंवेनर डॉ अरुण कुमार रॉय महतो ने कहा कि अनुच्छेद 51 ए के अनुसार, भारतीय संविधान के तहत पर्यावरण की रक्षा करना नागरिक के मौलिक कर्तव्यों में शामिल हैं। प्रो इंचार्ज गोपाल प्रजापति ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। डॉ खेमलाल महतो ने कहा कि जंगल है तो जल है, जल है तो कल है। डॉ रविंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पक्षियों की मीठी आवाज सुनना चाहते हैं तो पिंजरा नहीं खरीदें, बल्कि वृक्ष लगाएं।

आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में देश के बाईस राज्यों यथा पश्चिम बंगाल, मेघालय, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पांडिचेरी, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम आदि राज्यों व जगहों से लगभग 200 डेलीगेट पहुंचे हैं एवं उनके द्वारा पेपर प्रस्तुत टेकनिकल सेशन आयोजित कर किया जा रहा है।

बताया जाता है कि प्रथम दिन लगभग सौ से अधिक पेपर प्रस्तुत किए जा रहे हैं। टेक्निकल सत्र में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यम से देश भर के विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, शिक्षाविद, रिसर्च स्कॉलर, शोधार्थी, एनजीओ प्रतिनिधि, छात्र छात्रा अपना पेपर प्रस्तुत कर रहे हैं। दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्राप्त निष्कर्ष को झारखंड सरकार एवं भारत सरकार तक भेजा जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कुछ बेहतर किया जा सके।

उद्घाटन सत्र में मंच संचालन डॉ अरुण रंजन हिन्दी विभाग एवं डॉ अलीशा वंदना लकड़ा अंग्रेजी विभाग ने किया और उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. इंचार्ज गोपाल प्रजापति ने किया।
संध्या बेला में राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई ने नेशनल कॉन्फ्रेंस कल्चरल कमेटी कॉर्डिनेटर डॉ प्रभाकर कुमार के नेतृत्व एवं देखरेख में कल्चरल प्रस्तुति एनएसएस स्वयं सेवकों द्वारा आयोजन किया गया, जिनमें स्वयं सेवक काजल कुमारी, जागृति कुमारी, गुंजा पल्लवी कुमारी, कुमकुम कुमारी, मोहिनी कुमारी, रोशनी कुमारी, सोनिका कुमारी, राधा कुमारी, भूमि कुमारी, प्रियंका कुमारी, मधु कुमारी, सोनी, सुषमा, सपना, मिलन गुप्ता, सुमीत कुमार सिंह, सोनू कुमार शर्मा, करण कर्मकार, अमन तिवारी आदि रहे। झारखंड की संस्कृति, सांस्कृतिक प्रस्तुति कर सभी डेलीगेट को मंत्र मुग्ध किया गया।

दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मी नारायण, प्रो. इंचार्ज गोपाल प्रजापति, अन्य कॉलेज के प्राचार्य एवं प्रतिनिधिगण, डॉ गुप्तेश्वर सिंह, डॉ अरुण कुमार रॉय महतो, डॉ अलीशा वंदना लकड़ा, डॉ मधुरा केरकेट्टा, डॉ नीला पूर्णीमा तिर्की, डॉ साजन भारती, डॉ प्रभाकर कुमार, डॉ वासुदेव प्रजापति, डॉ व्यास कुमार, प्रो. अमीत कुमार रवि, प्रो. विपुल कुमार पांडेय, डॉ अरुण रंजन, डॉ सुशांत बैरा, डॉ शशि कुमार, प्रो. पी पी कुशवाहा, प्रो. संजय कुमार दास, प्रो. सुनीता कुमारी, कार्यालय कर्मी रविंद्र कुमार दास, सदन राम, रवि यादविंधु, मो. साजिद, शिव चन्द्र झा, कलावती देवी, हरीश नाग, एस कुजूर, दीपक कुमार रॉय, काजल कुमारी, करिश्मा कुमारी, बालेश्वर यादव, संजय, भगन, सुसारी, आशा आदि की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

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