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मंत्री योगेंद्र प्रसाद की पहल पर केबीपी परियोजना को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता

पचमो के रैयतों के हक व् आरएंडआर नीति पर विस्तृत चर्चा, त्वरित कार्रवाई के निर्देश

ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद की पहल पर 4 जुलाई को बोकारो जिला के हद में तेनुघाट स्थित सिंचाई विभाग के अतिथि गृह में बैठक की गयी। अध्यक्षता मंत्री ने की।

जानकारी के अनुसार जिला के हद में कोतरे–बसंतपुर–पचमो (केबीपी) परियोजना से प्रभावित गोमिया अंचल के पचमो पंचायत के रैयतों के हक एवं अधिकारों को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक में अपर समाहर्ता बोकारो सुनील चंद्रा, बेरमो के अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार, गोमिया अंचल अधिकारी आफताब आलम, सीसीएल हजारीबाग कोल क्षेत्र के महाप्रबंधक, सीसीएल रांची के भूमि एवं राजस्व विभाग के महाप्रबंधक, केबीपी परियोजना पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में प्रभावित रैयत उपस्थित रहे।

इस अवसर पर बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री योगेंद्र ने अधिकारियों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि पचमो पंचायत के रैयतों के साथ किसी प्रकार की राजनीति या भेदभाव नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) नीति के तहत रैयतों को मिलने वाले सभी हक और सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर जल्द उपलब्ध कराई जाएं।

मंत्री ने रैयतों की 15 सूत्री मांगों पर बिंदुवार समीक्षा की और प्रत्येक मांग पर सकारात्मक एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस दौरान रैयतों ने भी अपनी समस्याओं, चिंताओं और अधिकारों को मंत्री के समक्ष खुलकर रखा। बैठक में प्रबंधन ने बताया कि जिन मांगों का संबंध नीतिगत निर्णयों से है, उन्हें आवश्यक कार्रवाई के लिए सीसीएल मुख्यालय रांची भेजा जाएगा। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर लंबित सभी मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की गई। मंत्री ने कहा कि पचमो के रैयत लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अब उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। प्रबंधन के साथ हुई सार्थक वार्ता के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी है और शेष मामलों के समाधान की प्रक्रिया भी शीघ्र आगे बढ़ाई जाएगी। ज्ञात हो कि, यह मामला वर्ष 1981-82 से चल रहा था। त्रिपक्षीय वार्ता के सफल आयोजन पर उपस्थित रैयतों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बैठक उनके लंबे समय से लंबित हक और अधिकारों के समाधान की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगी।

 

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