राज्य सूचना आयुक्त चयन प्रक्रिया की जानकारी देने से विभाग का इंकार-चन्द्रदेव
अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ जजमेंट का हो रहा उल्लंघन-हमर अधिकार मंच
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। हमर अधिकार मंच झारखंड के सचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता चन्द्रदेव कुमार वर्णवाल ‘चंदू’ द्वारा बीते 4 अप्रैल को राज्य सूचना आयुक्त के पद पर चयनित अभ्यर्थियों की योग्यता, अनुभव, उपलब्धियों एवं चयन प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई थी।
उल्लेखनीय है कि वर्णवाल द्वारा कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग झारखंड सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर राज्य सूचना आयुक्त के पद हेतु प्राप्त आवेदनों में से पांच अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति के लिए राज्यपाल को भेजे जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जनविश्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, व्यापक ज्ञान, अनुभव, प्रतिष्ठा, वर्तमान व्यवसाय, उपलब्धियों तथा आवेदन के साथ संलग्न प्रमाण-पत्रों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
जानकारी देते हुए हमर अधिकार मंच के अध्यक्ष दीपेश निराला ने 19 जून को बताया कि विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण नियमानुसार प्रथम अपील दायर की गई। कहा कि इस संबंध में प्रथम अपीलवाद संख्या-20/26 की सुनवाई 19 जून 2026 को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी अमर कुमार, संयुक्त सचिव सर्वप्रथम प्राधिकारी के कार्यालय प्रोजेक्ट भवन रांची में आयोजित की गयी।
उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान स्थिति अत्यंत निराशाजनक रही। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पूर्व निर्देश के बावजूद संबंधित डीम्ड जन सूचना पदाधिकारी न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध करा सके और न ही आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सके। कहा गया कि पहले संचिका अपने पास नहीं होने की बात कही गई, फिर यह कहा गया कि संबंधित फाइल राज्यपाल के कार्यालय लोक भवन में है। इसके बाद बुलाए गए अन्य विभागीय पदाधिकारी ने भी यही तर्क दोहराया, जबकि बीते 10 जून को ही चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अधिसूचना कार्मिक विभाग ने जारी किया है।
निराला ने कहा कि यहां सवाल उठता है कि यदि संचिका लोकभवन में है तो फिर उस संचिका के आधार पर कार्मिक विभाग ने अधिसूचना कैसे जारी कर दी? और अब जब उसी संचिका से जुड़ी सूचना मांगी जा रही है तो उक्त संचिका का राज्यपाल कार्यालय लोक भवन में होने का बहाना बनाकर सूचना को रोका जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा मौखिक रूप से यह भी कहा गया कि राज्य सूचना आयुक्तों के शपथ ग्रहण के बाद सूचना उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नियुक्ति अथवा शपथ ग्रहण तक चयन प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों को रोका जाए, विशेषकर तब जब मांगी गई सूचना सार्वजनिक हित और पारदर्शिता से सीधे जुड़ी हो।

हमर अधिकार मंच के अध्यक्ष दीपेश निराला का मानना है कि राज्य सूचना आयुक्त का पद स्वयं सूचना के अधिकार और पारदर्शिता की रक्षा से जुड़ा संवैधानिक महत्व का पद है। ऐसे पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी अधिक पारदर्शी होगी, जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं में उतना ही मजबूत होगा, जैसा कि अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ और नमित शर्मा बनाम भारत संघ के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विभाग पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही विभाग सूचना उपलब्ध कराने में टालमटोल करता दिखाई दिया और मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के बजाय अपीलकर्ता को लगभग 220 किलोमीटर दूर गिरिडीह से रांची बुलाकर केवल औपचारिक सुनवाई की गई।
उन्होंने कहा कि यदि विभाग के पास अभिलेख उपलब्ध नहीं थे अथवा सूचना देने की तैयारी नहीं थी, तो सुनवाई की तिथि निर्धारित करने और अपीलकर्ता को उपस्थित होने के लिए बाध्य करने का कोई औचित्य नहीं था। यह न केवल सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है, बल्कि आम जनों के समय, श्रम और संसाधनों की भी अनदेखी है।
अध्यक्ष ने कहा कि हमर अधिकार मंच इस मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग करते हुए आगे की कार्रवाई करेगा तथा राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को जारी रखेगा।
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