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शिक्षकों का स्वमूल्यांकन नई शिक्षा नीति की अहम कड़ी-सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में आयोजित डीएवी झारखंड जोन-आई के सात विद्यालयों के त्रि-दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला के दूसरे दिन 16 मई को सीखने-सिखाने की नई तकनीकों का आदान-प्रदान किया गया।

जानकारी देते हुए डीएवी कथारा के शिक्षक बी. के. दसौंधी ने बताया कि दूसरे दिन का प्रथम सत्र सामान्य विषय आधारित था, जिसे सीबीएसई द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षकों द्वारा किया गया। डीएवी पब्लिक स्कूल भरेचनगर (रामगढ़) के प्राचार्य जी.पी.झा ने एक शिक्षक का स्वमूल्यांकन विषय पर सत्र लिया। इस सत्र में उन्होंने बताया कि एक शिक्षक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी होना चाहिए, ताकि वह अपने ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर विद्यार्थियों को चुनौती युक्त भविष्य के लिए तैयार कर सके। डीएवी इस्पात पब्लिक स्कूल सेक्टर II/सी बोकारो की प्राचार्या अनुराधा सिंह ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के मुख्य बिंदुओं से उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं को अवगत कराया।

इस अवसर पर झारखंड जोन आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी सह डीएवी कथारा के प्राचार्य डॉ जी.एन. खान ने अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के विषय पर सत्र लिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रायोगिक शिक्षा दी जानी चाहिए। एक विद्यार्थी के जीवन में विद्यालय की भूमिका पर उन्होंने विशेष बल दिया। कहा कि विद्यार्थियों को सामाजिक कौशल, भविष्य निर्माण की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वस्थ दिनचर्या, स्वच्छ वातावरण तथा आधुनिक तकनीकी साधनों से सुसज्जित कक्षा प्रदान करना विद्यालय का मूलभूत कर्तव्य है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार के लिए शुरू किए गए दो प्रमुख पहलुओं सफल और परख विषय पर भी चर्चा की।

कहा कि इनका उद्देश्य पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था, चाहे वह राज्य सरकार द्वारा संचालित विद्यालय हों या सीबीएसई द्वारा संचालित विद्यालय, सभी में एकरूपता लाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास ही किसी भी प्रकार की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। कहा कि दक्षता आधारित अधिगम वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ खान ने अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर विद्यार्थियों में संस्कारों के बीजारोपण की सलाह दी। कहा कि विद्यार्थियों के अंदर कृतज्ञता का भाव लाना होगा, जिससे वे ईश्वर, माता-पिता, गुरुजनों और अपने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ बनें। बहुबुद्धि सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह विद्यार्थियों को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सफल बनाने की राह दिखाएगा।

शिक्षकों को बच्चों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित ना होकर उनके भावनात्मक विकास के प्रति जागरूक होना चाहिए। सत्र के दौरान ही सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी ने ब्लैक डॉट स्टोरी की अवधारणा से सबको रूबरू कराया एवं इस बात पर विशेष बल दिया कि जीवन के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षक तथा शिक्षिकाओं से यह अपील की कि वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में कोई कसर बाकी ना छोड़े। यह राष्ट्र के प्रति उनका सबसे पहला कर्तव्य है।

यहां बाल- वाटिका, सभी विषयों के प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के प्रशिक्षकों ने विषय आधारित सत्र लिए एवं सभी सत्र लाभप्रद साबित हुआ। कार्यशाला में डीएवी पब्लिक स्कूल स्वांग के प्राचार्य अनुज मिश्रा, डीएवी पब्लिक स्कूल भवनाथपुर के प्राचार्य आकाश सिन्हा, डीएवी तेनुघाट की प्राचार्या स्तुति सिन्हा, डीएवी ललपनिया के प्राचार्य तन्मय बनर्जी, डीएवी दुग्दा के प्राचार्य प्रसेनजीत कुमार पॉल, डीएवी पब्लिक स्कूल भंडारीदाह के प्राचार्य रितेश कुमार ने विशेष तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यशाला के सफल संचालन में विद्यालय के एसटीएनसी नागेंद्र प्रसाद, डिप्टी एसटीएनसी पंकज कुमार एवं जितेंद्र दुबे, डॉ आर एस मिश्रा, आराधना, बी.के.दसौधी, राकेश रंजन, रितेश कुमार, जयपाल साव, वीणा कुमारी, रेखा कुमारी, खुशबू कुमारी, ममता पात्रा, सुमन कुमारी, आशा कुमारी, अर्शिया एजाज, सुरभि दुबे, मानसी सिन्हा, विकास कुमार, दीपक कुमार सहित सभी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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