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भारत वंदना घाट सोनपुर में महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

दीपों से जगमगाया सोनपुर का भारत वंदना घाट

​अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर के नमामि गंगे भारत वंदना घाट पर 16 मई को आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था शनि अमावस्या, वट सावित्री व्रत एवं शनि जयंती के पावन संयोग का, जिसे त्रिवेणी महाआरती के भव्य आयोजन के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर मां तारा सेवा निधि महातीर्थ (कौनहारा, हरिपुर, वैशाली) के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में महाकाल बाबा द्वारा पूरे विधि-विधान से नारायणी गंगा एवं सोनभद्र का पूजन किया गया। इसके बाद अर्चकों के सामूहिक शंखनाद के साथ भव्य महाआरती संपन्न किया गया।

श्रद्धालुओं द्वारा जलाए गए हजारों दीपों की रोशनी से सारण के सोनपुर तथा वैशाली के हाजीपुर के बीच पुराना गंडक पुल स्थित भारत वंदना घाट पूरी तरह जगमगा उठा। इस अलौकिक दृश्य को देखने और आरती के दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर ​महाकाल बाबा ने संस्था के सेवा कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि माँ तारा सेवा निधि सम्पूर्ण हरिहर क्षेत्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए संकल्पित है। उन्होंने जानकारी दी कि संस्था द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार
​प्रत्येक अमावस्या को पुराना गंडक पुल स्थित भारत वंदना घाट (सोनपुर) एवं ​प्रत्येक पूर्णिमा को श्रीगजेंद्र मोक्ष धाम कौनहारा महातीर्थ (वैशाली) में प्रत्येक कृष्ण पक्ष की दशमी को राजधानी पटना ​में इस भव्य त्रिवेणी महाआरती का आयोजन किया जाता रहा है। उन्होंने आमजनों को संदेश देते हुए कहा कि ​गंगा हमारी संस्कृति से जुड़ी रही है और सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर है। नदी को प्रदूषित न करें और इस पवित्र स्थल को स्वच्छ बनाए रखें।

​बाबा ने जनमानस से यह भी अपील करते हुए कहा कि गंगा सर्वकल्याणकारी है, जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हरिहर क्षेत्र के ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जनमानस को जागरूक कर इस पावन त्रिवेणी संगम पर अर्द्ध कुम्भ का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए उन्होंने सभी धर्मानुरागी सज्जनों से सहयोग की अपेक्षा जताई।

त्रिवेणी महाआरती का समापन महाकाल बाबा के आशीर्वचनों और विश्व कल्याण की कामना के साथ किया गया। घाट परिसर धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो जैसे ओजस्वी व् जनसंदेशी नारों से गुंजायमान हो उठा। इस भव्य महाआरती को सफल बनाने में स्थानीय समाजसेवी लालबाबू पटेल, आचार्य अनिल, अर्जुनजी, आदित्यजी, अविनाशजी एवं विपिनजी ने महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई।

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