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छात्र-शिक्षक अनुपात की समीक्षा जरूरी, छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं-एहतेशाम

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। रांची विश्वविद्यालय द्वारा अंगीभूत कॉलेजों से छात्र-शिक्षक अनुपात की रिपोर्ट मांगे जाने और कुछ कॉलेजों में विज्ञान विषयों को हटाने के फैसले पर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) ने गंभीर चिंता जताई है।

एआईएसएफ के रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 16 अगस्त को कहा कि छात्र-शिक्षक अनुपात की समीक्षा एक जरूरी कदम है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल शिक्षकों का स्थानांतरण या विषयों को बंद करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर विषय में पर्याप्त शिक्षक और छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं उपलब्ध हो। कहा कि रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत डोरंडा कॉलेज में उर्दू विषय के विद्यार्थी हैं, लेकिन यहां एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षक के अभाव में पढ़ाई से वंचित रखना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है।

एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कहा कि आरएलएसवाइ कॉलेज, एसएस मेमोरियल कॉलेज, जेएन कॉलेज धुर्वा और मांडर कॉलेज से विज्ञान के विषय हटाए जाने के फैसले का प्रभाव छात्रों पर पड़ सकता है। यदि इन विषयों की पढ़ाई के लिए छात्रों को दूसरे कॉलेजों में जाना पड़ेगा। ऐसे में उनके सामने यात्रा, समय और आर्थिक खर्च जैसी नई समस्याएं खड़ी होंगी। उन्होंने कहा कि विषयों में बदलाव से पहले विश्वविद्यालय को छात्रों की संख्या, शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता, स्थानीय जरूरत और विद्यार्थियों के भविष्य का विस्तृत अध्ययन करना चाहिए। केवल प्रशासनिक आंकड़ों के आधार पर विषय बंद करना उचित नहीं है।

उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय अपने सभी कॉलेजों में रिक्त शिक्षक पदों को जल्द भरे। छात्र-शिक्षक अनुपात की रिपोर्ट को सार्वजनिक करे। जिन विषयों में शिक्षक नहीं हैं, वहां तत्काल शिक्षकों की व्यवस्था करे। बंद किए गए विषयों के छात्रों के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे। शिक्षक का स्थानांतरण से पहले संबंधित कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न होने दे। छात्रों से जुड़े बड़े शैक्षणिक फैसलों में छात्र संगठनों से भी संवाद करे।

एहतेशाम ने कहा कि विश्वविद्यालय का हर फैसला छात्रों के हित में होना चाहिए। शिक्षकों की कमी दूर करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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