रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक (एमएमडीआर अमेण्डमेंट बिल)-2026 को लेकर झारखंड में सियासी विरोध तेज होने लगा है।
इसे लेकर 16 अगस्त को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) बोकारो जिला समिति की बैठक जैनामोड़ में जिलाध्यक्ष डॉ रतन लाल मांझी की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। बैठक में विधेयक के झारखंड पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक, सामाजिक एवं संवैधानिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मुख्य रूप से मौजूद राज्य के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि एमएमडीआर अमेण्डमेंट बिल से खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड वर्षों से खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण और जमीन से जुड़े संकट का सामना करता रहा है। ऐसे में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर राज्य की भूमिका कमजोर होने से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की जमीन से निकलती है, इसलिए उसके लाभ में झारखंड के हित और यहां के रहिवासियों के अधिकार की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। कहा कि झामुमो पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर आमजनों को विधेयक के संभावित प्रभावों की जानकारी देने और जनआंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कमेटी के दिशा-निर्देश के अनुसार एमएमडीआर अमेण्डमेंट बिल के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।
बैठक में विशिष्ट अतिथि चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि झारखंड ने लंबी लड़ाई के बाद राज्य का दर्जा हासिल किया है। अब जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों के अधिकार की लड़ाई को भी मजबूती से लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि खनिज से मिलने वाला राजस्व शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी योजनाओं की महत्वपूर्ण आधारशिला है। झारखंड के हितों को कमजोर करने वाली किसी भी नीति का एकजुट होकर विरोध किया जाएगा।
विधायक प्रतिनिधि मोहम्मद शेरे आलम ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से है। यहां के संसाधनों का लाभ सबसे पहले राज्य की जनता और खनन प्रभावित क्षेत्रों को मिलना चाहिए। कहा कि एमएमडीआर अमेण्डमेंट बिल के संभावित प्रभावों को लेकर कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। कसमार प्रखंड प्रमुख नियोती कुमारी ने कहा कि खनिज संपदा से सबसे अधिक प्रभावित स्थानीय रहिवासी होते हैं। विस्थापन और पर्यावरणीय समस्याओं का दंश झेलने वाले यहां के रहिवासियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कहा कि राज्य के अधिकारों और जनता के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। मनोहर मुर्मू ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर यहां के रहिवासियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पार्टी के निर्देश पर कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करेंगे।

झामुमो बोकारो जिलाध्यक्ष डॉ रतन लाल मांझी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक रूप से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर पार्टी एकजुट होकर आंदोलन करेगी।nबैठक का संचालन मुकेश कुमार महतो ने किया। मौके पर केंद्रीय सदस्य संतोष रजवार, मंटू यादव, राजू महतो, जयनारायण महतो, पूर्व जिलाध्यक्ष हीरालाल मांझी, अशोक मुर्मू सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।
ध्यान देने योग्य है कि उक्त बैठक से स्पष्ट संकेत मिला कि एमएमडीआर अमेण्डमेंट बिल झारखंड में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। झामुमो ने केंद्र सरकार के उक्त विधेयक के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी का संकेत देते हुए कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज पर झारखंड के हितों की अनदेखी किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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