सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने की मदद की अपील
प्रहरी संवाददाता/बगोदर (गिरिडीह)। झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिले के प्रवासी मजदूरों का विदेश में फंसने और मौत का सिलसिला जारी है। झारखंड के प्रवासी मजदूर के विदेश में फंसे होने का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस बार झारखंड के गिरिडीह जिला के हद में बगोदर थाना क्षेत्र के तिरला रहिवासी प्रवासी मजदूर लालचंद महतो का मामला प्रकाश में आया है। लालचंद दुबई में फंसे हैं।
प्रवासी मजदूर लालचंद महतो की पत्नी ने सरकार से गुहार लगाते हुए 4 जुलाई को कहा कि उसके पति रोजगार के लिए दुबई गये थे। वहाँ कारपेंटर (बढ़ई) के रूप में कार्यरत थे। दुर्भाग्यवश, दुबई में कार्य के दौरान उनका पासपोर्ट गुम हो गया। पासपोर्ट गुम होने के पश्चात उन्हें अनेक प्रशासनिक एवं कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पर रहा हैं। कंपनी द्वारा उन्हें कार्य से भी हटा दिया गया है।वर्तमान में वे अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रहे हैं। पीड़िता के अनुसार उसका पति अपने वापस वतन लौटना चाहते हैं, किंतु आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया एवं सहयोग के अभाव में उनका स्वदेश वापसी नहीं हो पा रहा है। उनके पास पैसा नहीं है। कहा कि मेरी स्थिति ऐसी है कि मेरे ससुर दशरथ महतो जो 2013 से मुंबई से लापता हैं की वजह से मेरी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है।
लालचंद मामले को लेकर प्रवासी श्रमिकों के लिए काम कर रहे क्षेत्र के समाजसेवी सिकन्दर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से लालचंद की सकुशल वतन वापसी के लिए ठोस पहल किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई बार प्रवासी मजदूर अधिक पैसा कमाने के लालच में विदेश जाकर फंस चुके हैं। साथ ही साथ कईयों की मौत भी हो गई है। ऐसे में काफी मशक्कत के बाद वैसे मजदूरों की वतन वापसी और शव आ पाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गिरिडीह जिले का द्वारका महतो और बोकारो जिले के सत्येंद्र महतो का शव सऊदी अरब में पड़ा है।
वहीं गिरिडीह जिला के हद में बगोदर रहिवासी महेंद्र महतो सऊदी में फंसा है। डुमरी रहिवासी हुलास महतो दुबई जेल में बंद है। इसके बावजूद प्रवासी मजदूर पुरानी घटनाओं से सबक नहीं ले रहे हैं। ऐसे में सरकार को मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार की व्यवस्था करने की जरूरत है।
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