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दहेज प्रताड़ना के दोषी पति को तीन साल की सजा

ममता सिन्हा/तेनुघाट(बोकारो)। तेनुघाट (Tenughat) व्यवहार न्यायालय के एसडीजेएम संजीत कुमार चंद्र (SDJM Sanjeet Kumar Chandra) ने दहेज मामले में दोषी पाने के बाद सुनील साव को 3 वर्ष की कारावास एवं 10,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद अभियुक्तों द्वारा इस सजा के विरुद्ध बोकारो जिला जज के न्यायालय में अपील करने के लिए जमानत पर छोड़ा गया।
बताते चलें कि परिवादनी जरीडीह निवासी रीना देवी ने तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम की अदालत में एक परिवाद पत्र वर्ष 2012 में दायर कर बताया था कि उसकी शादी 29 नवम्बर 2008 को सुनील साव के साथ हुई थी। दहेज के लिए उसके पति एवं ससुराल के लोग प्रताड़ित करते थे। उसे दो बच्चे भी हैं। 10 अक्टूबर 2010 को पति व ससुराल वाले मारपीट किए और बोले कि तुम्हारे पिता भंडारीडह सेल से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनसे 2 लाख रुपए मांग कर लाओ नहीं तो अनिल की दूसरी करा देंगे। उसके बाद परिवादनी रीना देवी के पिता के द्वारा समझाने बुझाने के बाद कुछ दिन ससुराल में ससुराल वाले ठीक से रखें। फिर 17 जून 2012 को अनिल साव ने दूसरी शादी कर ली। उसके बाद रीना देवी को ससुराल में प्रताड़ित किया जाने लगा।
परिवद में कहा गया है कि 14 सितंबर 2012 को अभियुक्त अनिल साव ने रीना देवी को जान मारने की नियत से मार मार कर अधमरा छोड़ दिया। होश आने पर वह किसी तरह अपने मायके आई। फिर अभियुक्त को उसके पिता ने ले जाने के लिए कहा। मगर 30 नवंबर 2012 को रीना देवी के मायके आकर अभियुक्त अनील साव ने मारपीट किया और उसे ले जाने से इंकार किया। उसके बाद परिवादिनी रीना देवी ने तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम की अदालत में मुकदमा दायर किया। जिसे जांच साक्ष्य के लिए एसडीजेएम चंद्रा के न्यायालय में स्थानांतरित किया गया। न्यायालय में परिवादनी की ओर से प्रस्तुत गवाह एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बहस सुनने के बाद एसडीजेएम चंद्र ने अभियुक्त अनील साव को दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पाने के बाद 3 वर्ष की सजा एवं पांच हजार रुपए की सजा सुनाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 9 माह की अतिरिक्त सजा होगी। वहीं दूसरी शादी करने के मामले में दोषी पाने के बाद 3 वर्ष की सजा एवं पांच हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाया गया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 9 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। दोनों सजाएं साथ साथ चलेगी। सजा सुनाने के बाद अभियुक्तों के द्वारा सजा के विरुद्ध बोकारो जिला जज के न्यायालय में अपील करने के लिए जमानत पर छोड़ा गया।

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