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आदिम जनजाति-पीवीटीजी का विकास करने को ले पंसस अयुब खान का टोला दौरा

घर नहीं, युवा नहीं कर रहे शादी सड़क के अभाव में एम्बुलेंस गांव में नहीं जाती

उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य कार्ड, आवास व पेंशन से वंचित हैं दर्जनों आदिम जनजाति

एस. पी. सक्सेना/लातेहार (झारखंड)। लातेहार जिला के हद में चंदवा प्रखंड के कामता पंचायत की ग्राम चटुआग के आदिम जनजाति – पीवीटीजी – परहैया टोला गांव का विकास डीएमएफटी मद से कराने की मांग को लेकर पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने ग्रामीणों संग स्कूल के प्रांगण में बीते 5 जुलाई की रात्रि पड़ाव किया। इसके पूर्व गांव का भ्रमण कर आदिम जनजाति परिवारों से मिलकर उन्होंने समस्याओं की जानकारी ली।

इस दौरान कई समस्या उभरकर सामने आई, जिसमें जेठनी देवी पति राजू कुमार परहैया का आवास जर्जर हालत में है। विजय परहैया के घर में कई वर्षों से घर नहीं रहने के कारण पलायन को भी मजबूर है। पंसस खान के अनुसार उक्त परिवार में कुल सात सदस्य हैं। इनमें कुसूम परहैया, रीता कुमारी बालिग हैं। वहीं गुलबी कुमारी, राजदीप परहैया, अमीत परहैया अभी छोटा है।

जेठनी देवी व राजू परहैया ने पंसस को बताया कि घर के अभाव में अपने बालिग पुत्र और पुत्री का शादी नहीं कर पा रहे हैं। कहा कि हर माता पिता का सपना होता है कि वो अपने बच्चों को दुल्हा या दुल्हन बनते देखें। परिजन चाहते हैं कि सही समय पर शादी करके उनके बच्चे अपना घर बसाकर खुश रहें, लेकिन घर के अभाव के कारण अपने बालिग पुत्र व् पुत्री का विवाह नहीं कर पा रहे हैं। माता पिता को बच्चों की शादी का सपना अबतक सपना ही बना है।

पंसस खान के अनुसार उक्त गांव के माईकल हंस के घर के समीप नदी में बने चुआंड़ी का दुषित पानी का सेवन करीब पांच छः परिवार आज भी कर रहे हैं। एक नल – जल है, लेकिन सभी के घरों में पानी नहीं जाती। कहा कि पंचायत के मुखिया द्वारा लगाया गया जलमीनार ही रहिवासियो के पेयजल का मुख्य श्रोत है। उन्होंने कहा कि उक्त गांव में बिजली कई घरों में आज भी नहीं पहुंच पाई है, इसके कारण रहिवासी बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं।

खान ने कहा कि उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय परहैया टोला की सड़क में जोखिम में जान डालकर यहां के आदिम जनजाति और आदिवासी छात्र-छात्रा पढ़ने जाते हैं। कहा कि सड़क अच्छी नहीं रहने के कारण रास्ते में जंगल झाड़ी हो गया है। जहरीले सांप के भय के साए में बच्चे स्कूल जाते हैं। स्कूल जाने के दौरान जहरीले सांप से बच्चों का कई बार सामना हो चुका है।

उन्होंने बताया कि कालीकरण पथ से परहैया टोला जाने के लिए ग्रेड वन सड़क है। मुख्य पथ से करीब आधे से अधिक किलोमीटर की दूरी पर है गांव है, लेकिन आज भी 108 एम्बुलेंस गांव में नहीं जाती है। कालीकरण सड़क तक एम्बुलेंस रुकी रहती है, बीमार मरीजों को खटिया डोली के सहारे एम्बुलेंस तक लाया जाता है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्वला योजना से यहां के दर्जनों आदिम जनजाति परिवार अबतक वंचित हैं। कहा कि पेंशन से भी यहां के दर्जनों आदिम जनजाति परिवार वंचित हैं। कहा कि गांव में रोजगार नहीं रहने के कारण परहैया टोला के 80 प्रतिशत आदिम जनजाति परिवार दुसरे प्रदेश में पलायन करते रहे हैं।

पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने सरकार से मांग की है कि परहैया टोला में तत्काल शिविर लगाकर स्मार्ट कार्ड, उज्ज्वला योजना, पेंशन, बिजली पोल, पेयजल समेत अन्य समस्याओं का सामाधान आन द स्पॉट किया जाय। सर्वे कर सड़क व पुल – पुलिया का निर्माण डीएमएफटी मद से कराया जाय।

रात्रि पड़ाव में उनके साथ स्थानीय रहिवासी दसवा परहैया, राजकुमार परहैया, सुरेंद्र परहैया, विजय परहैया, सनीका मुंडा, बुधराम बारला, अंकित परहैया, गबरेल मुंडा, ललु परहैया, कुसूम परहैया, विजय भेंगरा, बिनोद परहैया, अजय परहैया, बंधु होरो, दिपेश टोपनो, अमीत भेंगरा, पौलूस टोपनो, राजकुमार भोगता व अन्य शामिल थे।

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