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विद्यालय के समीप तालाब जीर्णोद्धार के विरोध में ग्रामीणों ने मंत्री को भेजा आवेदन

‎रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के मधुकरपुर पंचायत के ग्रामीणों ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय मधुकरपुर के समीप स्थित अंडबंदा तालाब में प्रस्तावित जीर्णोद्धार योजना का विरोध का रास्ता अख्तियार किया है।

ग्रामीण रहिवासियों ने उक्त योजना का विरोध करते हुए 30 मई को झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता सह उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद को आवेदन भेजकर योजना रद्द करने की मांग की है।

इस बावत ग्रामीणों का कहना है कि उक्त तालाब का वर्ष 2018 में लघु सिंचाई प्रमंडल बोकारो द्वारा जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। वर्तमान में तालाब की गहराई लगभग 15 से 20 फीट है और बरसात के दिनों में इसमें अत्यधिक जल भराव रहता है। पत्र में कहा गया है कि उक्त तालाब विद्यालय के मुख्य द्वार से सटा है, जिससे छात्र-छात्राओं, ग्रामीणों एवं मवेशियों के लिए हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुनः जीर्णोद्धार कर तालाब को और गहरा किया गया तो खतरा और बढ़ जाएगा।

ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षर आवेदन में कहा है कि विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस योजना को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। आवेदन पर पंचायत समिति सदस्य इंद्रजीत कुमार पांडेय समेत 30 ग्रामीण रहिवासियों के हस्ताक्षर हैं। इस बावत कसमार प्रखंड उप प्रमुख संजू देवी ने कहा कि विद्यालय के समीप स्थित तालाब को और गहरा करना बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

कहा कि जनहित और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को इस योजना की समीक्षा करनी चाहिए। पंसस इंद्रजीत पांडेय ने कहा कि तालाब का जीर्णोद्धार पहले ही हो चुका है। गांव में कई ऐसे तालाब और जलाशय हैं, जिन्हें विकास कार्यों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के बगल में स्थित तालाब को और गहरा करना भविष्य में दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

वार्ड सदस्य राहुल स्वर्णकार ने कहा कि ग्रामीणों की भावना और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस योजना को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। समाजसेवी कपिल रजक ने कहा कि शिक्षा का वातावरण सुरक्षित होना चाहिए। विद्यालय के आसपास किसी भी ऐसे कार्य को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए, जिससे बच्चों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए योजना को निरस्त करने की मांग की।
दूसरी ओर ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर उचित निर्णय लेने की अपील की है।

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