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मंत्री सुदिव्य कुमार का सारंडा दौरा से इको टूरिज्म विकास को मिलेगी रफ्तार

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने 30 अप्रैल को पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में सारंडा क्षेत्र का दौरा किया। यहां उन्होंने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को लेकर बड़ी पहल को लेकर वृक्षारोपण किया।

जानकारी के अनुसार झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का पश्चिमी सिंहभूम जिला आगमन विकास और पर्यटन के लिहाज से अहम संकेत दे गया। इस दौरान जिला मुख्यालय चाईबासा परिसदन में उनके स्वागत के दौरान प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आया।

सिंहभूम प्रमंडलीय आयुक्त रवि रंजन कुमार विक्रम, पुलिस उपमहानिरीक्षक अनुरंजन किस्पोट्टा, उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेनू और सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी अविरुप सिन्हा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मंत्री का भव्य स्वागत किया। यह स्वागत महज औपचारिकता नहीं, बल्कि जिले में विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने का संकेत भी माना जा रहा है।

इको टूरिज्म पर जोर, सारंडा बनेगा नया पर्यटन हब

इस अवसर पर जिला परिषदन में आयोजित बैठक के दौरान मंत्री सोनू ने अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। खासकर सारंडा जंगल क्षेत्र में इको टूरिज्म के विकास को लेकर उन्होंने गंभीरता दिखाई। वन विभाग से उन्होंने फॉरेस्ट भूमि की उपलब्धता और पर्यटन परियोजनाओं के विस्तार पर सीधा फीडबैक लिया। डीएफओ अविरुप सिन्हा के साथ हुई बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि सरकार सारंडा क्षेत्र को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

मंत्री ने गेस्ट हाउस और कैफेटेरिया का निरीक्षण कर किरीबुरू वन विभाग कार्यालय के नीचे निर्माणाधीन इको टूरिज्म परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण किया। यहां बन रहे गेस्ट हाउस और कैफेटेरिया जैसी सुविधाओं का उन्होंने बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। इसे जल्द से जल्द पर्यटकों के लिए तैयार किया जाए। उनका यह दौरा साफ संकेत देता है कि सरकार केवल घोषणा नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहती है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने उक्त परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म का मतलब केवल पर्यटन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाना भी है। मंत्री के दौरे के दौरान मौसम ने भी दिलचस्प करवट ली। खराब मौसम को देखते हुए मंत्री सेल के मेघालया गेस्ट हाउस पहुंचे। उनके पहुंचते ही क्षेत्र में तेज आंधी और भारी बारिश शुरू हो गई।

बारिश के बाद शाम होते-होते किरीबुरू का मौसम बेहद सुहाना हो गया। भीषण गर्मी के बीच ठंड का एहसास आमजनों को राहत दे गया। स्थानीय रहिवासियों का मानना है कि ऐसा मौसम अगर लगातार बना रहा, तो यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बन सकता है। सारंडा जैसे घने जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्र में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन अब तक बुनियादी सुविधाओं की कमी और योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन ने इसकी रफ्तार को रोके रखा है। मंत्री का यह दौरा संकेत देता है कि सरकार अब इस क्षेत्र को पर्यटन के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में गंभीर है। अगर योजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो सारंडा क्षेत्र आने वाले समय में झारखंड का प्रमुख इको टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है।

मंत्री का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सारंडा के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। देखना यह होगा कि उक्त बैठक में हुई चर्चाएं और दिए गए निर्देश जमीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं। अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक प्रतिबद्धता बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब सारंडा जंगल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक नई पहचान बन जाएगा।

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