साढ़े चार साल की बच्ची से 75 वर्षीय महिला तक बनीं शिकार
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड में 12 अगस्त का दिन ग्रामीण रहिवासियों के लिए दहशत भरा रहा। सुबह नावाडीह में एक साढ़े चार साल की बच्ची पर हुए हमले से शुरू सिलसिला दिनभर अलग-अलग गांवों तक पहुंचता रहा।
जानकारी के अनुसार प्रखंड के हद में नावाडीह, बगदा, टांगटोना, पुरनी बगियारी, रघुनाथपुर और लालमटिया में लोमड़ी के हमले में 12 ग्रामीण रहिवासियों के घायल होने की सूचना है। हमलों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। आखिरकार खेत में काम कर रहे ग्रामीणों पर हमला करने की कोशिश के दौरान स्थानीय रहिवासियों ने लोमड़ी को घेर लिया और आत्मरक्षा में उसे मार डाला। इसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
बताया जाता है कि सुबह करीब साढ़े सात बजे नावाडीह रहिवासी निर्मल महतो की साढ़े चार वर्षीय पुत्री रूही कुमारी घर के दरवाजे के सामने खेल रही थी। इस दौरान लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया। बच्ची के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। उसे बचाने पहुंचे उसके बड़े पिता राजेश महतो पर भी लोमड़ी ने हमला किया। उन्होंने किसी तरह खुद को बचाते हुए बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ाया। प्राथमिक उपचार के बाद रूही को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसमार ले जाया गया। नावाडीह में ही 32 वर्षीय राहुल महतो और 25 वर्षीय राजू कुमार के भी घायल होने की जानकारी है।
इसके बाद बगदा में 47 वर्षीय सागर कुमार स्वर्णकार उर्फ गौतम लोमड़ी के हमले में जख्मी हो गये। वहीं टांगटोना में 75 साल के राधा महतो (75), 30 वर्षिया लालमणि देवी और पार्वती देवी के घायल होने की सूचना है। पुरनी बगियारी में 10 वर्षीय राकेश कुमार महतो तथा लालमटिया में 33 वर्षिया बुधनी देवी भी लोमड़ी के हमले का शिकार हो गये।
बताया जाता है कि सबसे अधिक घटनाओं में रघुनाथपुर भी प्रभावित रहा। यहां 65 वर्षिया झालुवा देवी पर लोमड़ी ने हमला किया। उन्हें बचाने पहुंचे दुर्गाचरण महतो के 34 वर्षीय पुत्र अनूप कुमार महतो पर भी उसने हमला कर दिया। इसी गांव में नदी से स्नान कर लौट रही 17 वर्षिया जुली कुमारी को भी लोमड़ी ने जख्मी कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार लोमड़ी ने वीरेंद्र करमाली की गाय पर भी हमला कर उसे घायल कर दिया गया। लगातार हमलों के बीच जब लोमड़ी खेत में काम कर रहे स्थानीय रहिवासियों की ओर बढ़ी तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर उसे घेर लिया। ग्रामीणों के अनुसार अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने लोमड़ी को मार डाला। उसका शव मिलने के बाद इलाके में फैली दहशत कुछ कम हुई।
झामुमो नेता सिकंदर कपरदार, भाकपा माले नेता शकुर अंसारी, युवा समाजसेवी विक्रम सिंह, सुबोध कुमार महतो, प्रदीप कुमार महतो और वार्ड सदस्य वीरेंद्र करमाली ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह के वन्यजीव हमले पहले भी होते रहे हैं। कहा कि एक ही दिन में कई रहिवासियों के घायल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग को प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि लोमड़ी जिस तरह लगातार आबादी वाले इलाकों में पहुंचकर आमजनों पर हमला कर रही थी, उससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगल और आबादी के बीच के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी उपाय करने की मांग की है। घटना की सूचना वन विभाग को भी दी गई है। लगातार हमलों के बाद प्रभावित गांवों में रहिवासी बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं और शाम के बाद विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
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