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वन सुरक्षा समिति की मांग पर बढ़ी मुआवजा राशि, जिले में प्रावधान का पहला मामला

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के दुर्गापुर ललमटिया रहिवासी बुधनी देवी की जंगली सियार के हमले में घायल होने के बाद इलाज के क्रम में बीते 3 सितंबर को रिम्स रांची में निधन हो गया था। बताया जाता है कि 7 सितंबर को राज्य सरकार एवं वन विभाग की ओर से मृतका के परिवार को मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

बताया जाता है कि मृतका के पति बनमाली महतो को तत्काल क्रियाकर्म के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई। वहीं, कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 लाख 50 हजार रुपये और दिए जाएंगे। इसमें 4 लाख 50 हजार रुपये का चेक तथा 5 लाख रुपये उनके नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त मृतका के आश्रित को तीन वर्षों तक प्रतिमाह 2 हजार रुपये की सहायता राशि मिलेगी।

बताया गया कि राज्य सरकार ने जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर मुआवजा राशि बढ़ाने का नया नियम लागू किया है। इसके तहत कुल 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। बोकारो जिले में नए नियम के तहत जंगली जानवर के हमले में मौत के मामले में 10 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का यह पहला मामला बताया जा रहा है।

वन सुरक्षा समिति के उत्तरी छोटानागपुर अध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने कहा कि जंगली जानवरों के हमले में ग्रामीणों की मौत बेहद दु:खद और गंभीर चिंता का विषय है। जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण आए दिन वन्यजीवों के खतरे के बीच जीवन यापन करते हैं। किसी परिवार के सदस्य की जंगली जानवर के हमले में मौत हो जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट के साथ-साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि वन सुरक्षा समिति लंबे समय से सरकार के समक्ष जंगली जानवरों के हमले में मृत परिवारों को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग करती रही है। समिति की मांग और ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने मुआवजा राशि में बढ़ोतरी की है। इसके लिए उन्होंने सरकार और वन विभाग के प्रति आभार जताया।

महतो ने कहा कि मृतका बुधनी देवी के परिवार को कुल 10 लाख रुपये की सहायता मिलना पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत है। उन्होंने मांग की कि शेष मुआवजा राशि की कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी कर परिवार को भुगतान किया जाए। साथ ही जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग को ग्रामीणों के साथ समन्वय बनाकर ठोस एवं स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए।

समिति के केंद्रीय कोषाध्यक्ष आनंद कुमार महतो ने कहा कि बुधनी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसे समय में सरकार एवं वन विभाग द्वारा तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता देना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि मुआवजा राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने से जंगली जानवरों के हमले में प्रभावित होने वाले परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। कहा कि शेष राशि का भुगतान भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी होते ही शीघ्र किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

भाजपा कसमार मंडल महामंत्री अनीश कुमार जायसवाल ने कहा कि जंगली सियार के हमले में बुधनी की मौत अत्यंत दु:खद घटना है। परिवार ने अपना एक सदस्य खोया है, जिसकी भरपायी किसी भी आर्थिक सहायता से नहीं हो सकती। सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक का मुआवजा निर्धारित किया जाना पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशील पहल है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों के हमले की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग को जंगल से सटे गांवों में विशेष निगरानी व्यवस्था करनी चाहिए। ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के उपायों की जानकारी देने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

दुर्गापुर पंचायत समिति के पूर्व सदस्य रामकिशुन महतो ने कहा कि बुधनी की जंगली सियार के हमले में हुई मौत से पूरे क्षेत्र के रहिवासी मर्माहत हैं। परिवार ने अपना एक सदस्य खोया है, ऐसे दु:ख की घड़ी में सरकार और वन विभाग द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना राहत देने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि तत्काल 50 हजार रुपये की राशि मिलने से परिवार को अंतिम संस्कार एवं क्रियाकर्म में सहायता मिलेगी। सरकार द्वारा शेष 9 लाख 50 हजार रुपये की राशि भी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस अवसर पर वनरक्षी सुरेश टुडू, रामकिशुन महतो, जगदीश महतो, देवनाथ महतो, सृष्टिधर महतो, सुनीता देवी (प्रदान), बालेश्वरी देवी, बाबूराम महतो, ललित महतो समेत अन्य उपस्थित थे।

 

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