एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। देशवासियों अब चुप रहना राष्ट्र-घात है, क्योंकि बंग्लादेश घुसपैठिए का देश मे भाजपा सिर्फ वोट लेने का नारा बना दिया है, जबकि हकीकत आज कुछ और है। उक्त बाते झारखंड की राजधानी रांची के हटिया स्थित अपने कार्यालय में 29 मार्च को वरिष्ट कांग्रेसी विजय शंकर नायक ने कही।
उन्होंने कहा कि हमारे देश की नस-नस में आज बंग्लादेश घुसपैठिए का जहर घोला जा रहा है, जबकि सबसे बड़ा खुलासा यह है कि वर्ष 2005 की मनमोहन सिंह की कांग्रेस-यूपीए सरकार ने इन घुसपैठियों को सख्ती से खदेड़ा। कहा कि नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार के 12 साल से ज्यादा के तानाशाही राज में यह समस्या और भयानक रूप ले चुकी है। आंकड़े चीख-चीखकर मोदी सरकार की नंगी नाकामी, ढोंग और वोट-बैंक के खेल को बेनकाब कर रहे हैं। ये कोई साधारण आलोचना नहीं गृह मंत्रालय, संसदीय जवाबों और आधिकारिक रिपोर्टों की कड़वी, जली-भुनी सच्चाई है।
नायक ने कहा कि कांग्रेस ने कानूनी सख्ती से लाखो घुसपैठियों को रोका, भाजपा ने सिर्फ चुनावी नारा बनाकर सिर्फ और सिर्फ जुमला चलाया। बिना कोर्ट, बिना वेरिफिकेशन, निर्दोष भारतीय बंगाली नागरिकों को भी कुचलते हुए ये है भाजपा का राष्ट्रवाद। भाषणों में आग, एक्शन में सिर्फ राख और धोखा।
कांग्रेस-यूपीए की बेदर्द सख्ती व् कानूनी तरीके से खदेड़े गए 88,792 घुसपैठिए
नायक ने कहा कि मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को बिना किसी पाखंड के, बिना वोट-बैंक के चश्मे के साफ-सुथरा जवाब दिया। गृह मंत्रालय के संसदीय जवाबों के मुताबिक वर्ष 2005 से 2013 तक कुल 88,792 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पूरी कानूनी प्रक्रिया से भारत से डिपोर्ट किया गया। आंकड़े हिंदुस्तान टाइम्स और संसद रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह कोई जुमला नहीं, असली एक्शन है। कहा कि साल-दर-साल का तीखा हिसाब देखिए, जो कांग्रेस की दूरदर्शिता को चमकाता है।
नायक के अनुसार वर्ष 2005 में 14,916, वर्ष 2006 में 13,692, वर्ष 2007 में 12,135, वर्ष 2009 में 10,602, वर्ष 2010 में 6,290, वर्ष 2011 में 6,761, वर्ष 2012 में 6,537 तथा वर्ष 2013 में 5,234 घुसपैठियों को डिपोर्ट किया गया। उन्होंने कहा कि तब कांग्रेस सरकार ने घुसपैठ को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना। प्रक्रिया को पारदर्शी, कानूनी और बिना भेदभाव के रखी। कोई कम्युनल एजेंडा नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित। कहा कि तब यूपीए सरकार ने साबित कर दिया था कि सच्ची सरकार घुसपैठियों को बिना शोर के खदेड़ सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक के मोदी सरकार का शर्मनाक, घोर विश्वासघात के तहत सिर्फ मुट्ठी भर को डिपोर्ट, जबकि लाखों घुसपैठिए अंदर घुसकर देश को लूट रहे है। कहा कि मोदी सरकार सत्ता में आई तो घुसपैठिए बाहर, भारत माता की जय का नारा लगाया गया, लेकिन हकीकत 2014 से 2019 तक मात्र 2,566 बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया गया। यानी कांग्रेस के मुकाबले शर्मनाक 90 प्रतिशत की गिरावट।
नायक ने बताया कि साल-दर-साल का आंकड़ा मोदी सरकार की नंगी नाकामी का आईना है। कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014 में 989, वर्ष 2015 में 474, वर्ष 2016 में 308, वर्ष 2017: 51, वर्ष 2018 में 445, वर्ष 2019 में 299 सहित वर्ष 2020 के बाद औपचारिक डिपोर्टेशन सैकड़ों में सिमटकर रह गए। कहा कि बीते वर्ष 2025 में दिल्ली में 2,200+ का ढिंढोरा पीटा गया, लेकिन ये ज्यादातर ऑपरेशन सिंदूर जैसे नामों तले किए गए ब्लाइंड पुशबैक थे। बिना कोर्ट, बिना दस्तावेज, निर्दोषों को भी सड़क पर लुटेरों की तरह धकेलकर, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पुशबैक के आंकड़े अलग दिखाकर सरकार आंखों में धूल झोंक रही है। कुल मिलाकर मोदी काल में औपचारिक डिपोर्टेशन कुछ हजार ही रहे, जबकि घुसपैठ की बाढ़ जारी।
सरकार का 4,096 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग का जुमला अधूरा है। लेट-लतीफी और घोटालों का शिकार। सीएए-एनआरसी सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट करने का साम्प्रदायिकता हथियार है। असली घुसपैठ रुकी नहीं, उल्टा एनआरसी से 19 लाख निर्दोष बाहर आए और असम में आग लग गई।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल से सत्ता पर काबिज मोदी-शाह की जोड़ी घुसपैठ पर लगाम क्यों नहीं लगा पाई? जवाब साफ और ज्वलंत है: पुशबैक का क्रूर ढोंग। कानूनी डिपोर्ट की जगह ब्लाइंडफोल्डेड, बिना वेरिफिकेशन पुशबैक।
मानवाधिकार संगठन इसे स्टेल्थी पुशबैक कहते हैं। गैर-कानूनी, निर्दयी और भारतीय नागरिकों पर भी अत्याचार।
डिप्लोमेसी का पूर्ण पतन। कहा कि बांग्लादेश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करता है, लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति? सिर्फ सेल्फी और जुमला। घुसपैठिया शब्द को चुनावी हथियार बनाकर मोदी सरकार ने साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण किया, लेकिन असल में असम, बंगाल, दिल्ली में वोट के लालच में आंखें मूंद ली। अनुमान है कि एक से 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी अभी भी देश में रोजगार छीन रहे है। संसाधन लूट रहे है। महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे है। अपराध बढ़ा रहे है, लेकिन मोदी सरकार के पास सिर्फ भाषण है, धरातल पर कार्रवाई नगन्य।
नायक के अनुसार कांग्रेस ने 8-9 साल में 89 हजार खदेड़े, मोदी ने 12 साल में मुट्ठी भर। ये तुलना भाजपा के घोर विश्वासघात को नंगी तलवार की तरह उजागर करती है। फेंसिंग आधा-अधूरा। टेक्नोलॉजी केवल पेपर पर तथा एक्शन सिर्फ मीडिया शो। घुसपैठ का विनाशकारी हमला राष्ट्र की जान पर बन आई है और भाजपा इसे चुनावी नारा बना कर रख दी है। ये घुसपैठिए सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्र-विरोधी बम हैं। असम की संस्कृति मिट रही है। पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक तनाव फूट रहा है। शहरों में स्थानीय युवा बेरोजगार भटक रहे है। कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में इससे संतुलित, कानूनी तरीके से निपटा, जबकि भाजपा ने इसे साम्प्रदायिकता का जहर बनाकर देश को बांट दिया।
सीएए जैसे कानूनों ने मुद्दे को और उलझाया, असली घुसपैठ पर कोई असर नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से कहती रही है कि घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, लेकिन बिना भेदभाव, बिना पोलाराइजेशन के मनमोहन सिंह सरकार ने साबित किया कि सख्त प्रशासन से काम होता है। कांग्रेस की मांग है कि बॉर्डर पर असली सुरक्षा, मजबूत डिप्लोमेसी, विदेशी ट्रिब्यूनल्स को ताकत, लेकिन निर्दोष भारतीयों को मत सताओ। विकास और रोजगार से सीमा क्षेत्रों को इतना समृद्ध बनाओ कि घुसपैठ की वजहें ही खत्म हो जाए। मोदी सरकार का घुसपैठ मुक्त भारत जुमला चुनावी पुशबैक ड्राइव में भी फेल साबित हो रहा है। सिर्फ शोर, कोई स्थायी समाधान नहीं।
अब और सहन नहीं सच्चाई का तूफान। देशवासियो, जागो, प्रचारबाजी बंद, परिणाम मांगो। बांग्लादेश के साथ सख्त डिप्लोमेसी, असली टेक्नोलॉजी, निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया। कांग्रेस ने दिखाया कि सत्ता में रहते राष्ट्रहित में काम किया जा सकता है। मोदी सरकार की लगातार घोर नाकामी ने साबित कर दिया कि सत्ता और समाधान दो अलग चीजें हैं।
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