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प्रशासनिक उदासीनता के बीच जन-उत्साह का शंखनाद

जेआईआईटी एजुकेशन एकेडमी में सोनपुर अनुमंडल स्थापना दिवस का आयोजन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के बैजलपुर स्थित जेआईआईटी एजुकेशन एकेडमी के प्रांगण में एक अप्रैल को सोनपुर अनुमंडल का स्थापना दिवस गरिमामयी वातावरण में आयोजित किया गया।

जहाँ एक ओर यह आयोजन क्षेत्रीय गौरव और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर वक्ताओं ने प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे जनमानस की भावनाओं का निरादर बताया।
​समारोह के दौरान अनुमंडल बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथ सिंह को उनकी दीर्घकालिक सेवाओं और अटूट संघर्ष के लिए सम्मानित किया गया।

गरीब रक्षक आर्मी के प्रमुख व विख्यात समाजसेवी प्रभात रंजन ने उन्हें प्रसिद्ध धर्म ग्रंथ रामचरितमानस की प्रति भेंट कर सम्मानित किया। यह क्षण सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक मूल्यों के सामंजस्य का जीवंत उदाहरण रहा।

​प्रशासनिक उपेक्षा पर कड़ा प्रहार

​इस अवसर पर सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष भरत सिंह ने अपने संबोधन में प्रशासन के प्रति तीखा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ​अनुमंडल स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सोनपुर की अस्मिता और पहचान का पर्व है। ऐसे गौरवशाली दिवस पर प्रशासनिक स्तर पर छाई चुप्पी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वे मांग करते हैं कि भविष्य में शासन इसे आधिकारिक उत्सव के रूप में आयोजित करे।

​​मुख्य अतिथि विश्वनाथ सिंह ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि सोनपुर के अधिकारों की प्राप्ति हेतु उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक इसे इसका वास्तविक हक नहीं मिल जाता। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि क्षेत्रीय विकास और सामाजिक न्याय के लिए नई पीढ़ी को नेतृत्व संभालना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुमंडल की अनदेखी अब और स्वीकार्य नहीं होगी।​

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभात रंजन जबकि मंच का कुशल संचालन संजीत कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से समाजसेवी ​शिवकांत सिंह, ​बिपिन कुमार सिंह, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के
​यशवंत कुमार,​ प्रियव्रत सिंह उर्फ मैक्स सर एवं ​सतीश कुमार शामिल थे।

यह आयोजन केवल एक स्थापना दिवस का उत्सव मात्र नहीं था, बल्कि यह शिक्षा, एकता और अधिकारों के प्रति जन-जागरण का एक सशक्त संदेश था, जिसने शासन को उसकी नैतिक जिम्मेदारियों का स्मरण कराया।

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