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गोमियां की जनता ने नेता नहीं अपना अभिभावक खोया-अजय कुमार सिंह

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। झारखंड में जननायक माधव लाल सिंह का निधन राज्य और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। राज्य के शीर्ष सदन के सदस्य होने के बावजूद आम आदमी की तरह रहना माधव बाबू की पहचान थी। पूरा गोमिया विधानसभा क्षेत्र उन्हें नेता नहीं बल्कि अभिभावक मानता था। उक्त बाते श्रमिक नेता अजय कुमार सिंह ने 15 मई को कही।

उन्होंने कहा कि दिवंगत माधव लाल सिंह अपने समर्थकों के लिए शक्ति और ऊर्जा का स्रोत थे। वे इकलौते नेता थे जिनकी कथनी और करनी एक समान थी। गरीब, लाचार और उपेक्षित वर्गो के वे एकमात्र सहारा थे। गरीबों की सेवा आदर भाव से करना उनकी जीवन शैली में शामिल था।

श्रमिक नेता सिंह ने कहा कि स्वर्गीय माधव बाबू हमेशा कार्यकर्ताओं को सम्मान देते थे। कार्यकर्ताओं के कहने पर जिस भी मिशन में आगे बढ़े, उसमें सफलता अथवा असफलता की परवाह किए बिना डटे रहे। कभी विचलित नहीं हुए। वे व्यक्तिगत तौर पर अधिकांश कार्यकर्ताओं को नाम से पुकारते थे, जो शायद ही किसी और नेता में संभव हो।

सिंह ने कहा कि माधव लाल सिंह का निधन सामाजिक तौर पर बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। इनके जीवन से वर्तमान नेताओं को सीख लेनी चाहिए। सेवा भाव ही उनका अंतिम समय तक लक्ष्य रहा। विधायक और मंत्री रहते हुए भी पद का गुरूर कभी नहीं किया, गलत रास्ते पर नहीं चले।

दिवंगत माधव लाल सिंह के निधन पर श्रमिक नेता सिंह ने परम सत्ता से शोक संतप्त परिवार को दु:ख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। दिवंगत सिंह के प्रति शोक व्यक्त करने वालों में चंद्रशेखर प्रसाद, आशीष चक्रवर्ती, रंजय कुमार सिंह, विजय यादव, रणजीत सिंह, देवाशीष आस, कमल कांत सिंह, सूर्यकांत त्रिपाठी, संतोष सिन्हा, अमनदीप सिंह, नरेंद्र कुमार त्रिपाठी, मोहम्मद शमीम, मोहम्मद नसीम, गोपाल राम, संदीप रवानी, विजय नायक, अर्जुन चौहान, भीखम कुमार, पिंटू कुमार सहित अन्य शामिल थे।

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