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बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सहयोगिनी ने प्रशासन के साथ मनाया सतर्कता दिवस

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन सहयोगिनी ने अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया। इसमें बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ), सहिया, आशा कार्यकर्त्ता, बोकारो जिला बाल संरक्षण इकाई ने भी सहयोग दिया और जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प दोहराया।

सहयोगिनी संस्था ने जिला प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है और जिले में हजारों रहिवासियों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। संगठन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है। सहयोगिनी देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।

बोकारो जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए सहयोगिनी के निदेशक गौतम सागर ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कत्तई स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है, लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि चंद वर्षों पहले तक किसी को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बाराती और लड़की पक्ष के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है। लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं। अब रहिवासी बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है।

यह एक उल्लेखनीय बदलाव है। हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। गौतम सागर ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन 250 से भी ज्यादा सहयोगियों के साथ बाल विवाह की ऊंची दर वाले देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में इस अपराध के खिलाफ अभियान चला रहा है। इस नेटवर्क ने अब तक पांच लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं।

इस दौरान बोकारो जिला के कसमार, चंदनक्यारी, चास, चंद्रपुरा, जरीडीह, पेटरवार तथा गोमिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, बाल संरक्षण पदाधिकारी, बाल कल्याण समिति डालसा, थाना प्रभारी, आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, धर्मगुरु के साथ विशेष सतर्कता बरतने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अभियान में सहयोगिनी की सूर्यमणि देवी, रवि कुमार राय, सोनी कुमारी, विकास कुमार गोस्वामी, अनिल हेंब्रम, कुमारी किरण, मंजू देवी, प्रकाश कुमार महतो, विनीता देवी, रेखा देवी, संगीता देवी, पुष्पा देवी आदि शामिल थे।

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