प्रहरी संवाददाता/बोकारो थर्मल (बोकारो)। विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय संघर्ष समिति, केन्द्रीय कमिटि की ओर से डीवीसी में व्याप्त विस्थापित समस्याओं के समाधान को लेकर झारखंड की राजधानी रांची के लोक भवन नागा बाबा खटाल समीप 9 अप्रैल को अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही मांगो से संबंधित मांग पत्र राज्यपाल कार्यालय को सौंपा गया है।
इसकी जानकारी विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय संघर्ष समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष दिनेश्वर मण्डल ने 31 मार्च को बोकारो थर्मल में दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में 31 मार्च को राज्य भवन समक्ष धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया था, परंतु किसी कारणवश अब 9 अप्रैल को लोक भवन के समक्ष धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि डीवीसी प्रबंधन अपने स्वार्थ के लिए विस्थापितों की नियोजन नीति एकतरफा बना कर विस्थापित समस्याओं को वषों से लटका कर रखा है। लम्बित समस्या को हल करने के बजाय झूठा आश्वासन देकर विस्थापितों को ठगने का कार्य वर्षों से कर रही है।
उन्होंने बताया कि डीवीसी के बोकारो थर्मल सहित मैथन, पंचैत, चन्द्रपुरा, तिलैया एवं कौनार डैम जैसे जगहो पर डीवीसी रैयतो की जमीन अधिग्रहण की है। जमीन के बदले कई विस्थापित रैयतों को न नियोजन दिया गया है और न ही मुआवजा। पुनर्वासित गावों के रैयतों को जमीन का मालिकाना हक भी नहीं दिया गया है। नियोजन की मांग करने वाले रैयत विस्थापित आंदोलनकारियों को झूठे मुकदमो में फंसा कर कई तरह से प्रताड़ित कर जेल भेजा जा रहा है। कहा कि जमीन देने वाले रैयत अब एकता बद्ध होकर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है।
क्योंकि हजारो विस्थापित वर्तमान में दयनीय स्थिति में है और विस्थापित परिवार के नई पीढ़ी आज सड़को पर भीख माँगने, कोयला चोरी करने को विवश है। जिसका जिम्मेवार डीवीसी प्रबंधन है। इसलिए आगामी 9 अप्रैल को लोक भवन के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन विस्थापित अपने परिवार के साथ करेंगे।
जिसमें विस्थापितों का मुख्य मांग है कि जिन विस्थापितों की जमीन डीवीसी ने ली है उनके परिवारों को 50 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जाए, डीवीसी मुख्यालय झारखण्ड में लाया जाए, डीवीसी के तमाम प्रतिष्ठानों में पानी, बिजली एवं सिंचाई का साधन मुफ्त किया जाए, तमाम विस्थापितों को जिन्हें नौकरी नहीं मिला है उस परिवार को 50 लाख रूपया एक मुस्त मुआवजा दिया जाए, तमाम विस्थापितों को रिक्त पदों में योग्यतानुसार नौकरी दिया जाए,, डीवीसी सीएसआर कर्मियों को अनुबंध के आधार पर महंगाई के अनुसार मानदेय दिया जाय, सामाजीक एकीकरण कार्यक्रम के कार्य में विस्थापित गाँव को विशेष प्राथमिक्ता दिया जाय, डीवीसी द्वारा बसाए गये विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए, बोकारो थर्मल में 85 विस्थापितों को नौकरी दिया जाए अन्यथा 50 लाख रूपये दिया जाए आदि विस्थापित समस्याओं से संबंधित 12 सूत्री मांगे शामिल हैं।
ज्ञात हो कि आंदोलन को सफल बनाने को लेकर दामोदर घाटी के विस्थापित्तो एवं स्थानीय परिवारों की एक संयुक्त मोर्चा कमिटी का गठन किया गया है, जिसमें विस्थापित संघ कोनार डैम, भुमिहाश बेरोजगार संघर्ष समिति तिलैया डैम, विस्थापित एवं स्थानीय संघर्ष मोर्चा चंद्रपुरा एवं बोकारो थर्मल, वास्तुहास संग्राम संघ मैथन डैम एवं पंचेत डैम, दामोदर वैली वास्तुहारा मजदूर संग्राम समिति जामतारा, दामोदर वैली क्षतिग्रस्त कृषक समिति आरटीपीएस आदि विस्थापित समितियां इस आंदोलन में भाग लेंगे। इस अवसर पर विस्थापित नेता कैलाश करमाली सहित अन्य विस्थापित उपस्थित थे।
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