सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में गुवा बाजार में बीते 28 मार्च की देर शामिल दिपासाई के विस्थापितों ने एक अहम बैठक की। बैठक की अध्यक्षता गुवासाई के मुंडा मंगल पूर्ती ने की। इसमें बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों के रहिवासी शामिल हुए और अपनी समस्याओं को एकजुट होकर उठाया।
बैठक को संबोधित करते हुए मुंडा मंगल पूर्ती ने कहा कि गुवा सेल प्रबंधन द्वारा नए प्रोजेक्ट की तैयारी की जा रही है, लेकिन किसी भी योजना को लागू करने या विस्थापितों को हटाने से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि झारखंड में पेसा कानून लागू है, जिसके तहत ग्राम सभा और मुंडा समिति की सहमति के बिना कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद सेल प्रबंधन द्वारा इस कानून की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सभी विस्थापित 30 मार्च को पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में जिला उपायुक्त के समक्ष बैठक कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
बैठक में यह भी बताया गया कि पूर्व में कंपनी द्वारा स्थानीय रहिवासियों को यहां बसाया गया था, लेकिन वर्ष 2000 में सेल द्वारा गुवा खदान को लीज पर लेने के बाद से लगातार रहिवासियों को उजाड़ा जा रहा है।
कहा गया कि सेल प्रबंधन ने विस्थापितों के लिए मात्र 184 घर बनाए हैं, जबकि लगभग 500 रहिवासियों को यहां से हटाया जा रहा है। ऐसे में शेष के पुनर्वास पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बैठक मांग की गयी कि नए सिरे से सर्वे कर सभी प्रभावितों को बसाया जाना चाहिए। बैठक में विस्थापितों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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