अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पूर्व मध्य रेलवे के हद में सोनपुर रेल मंडल मुख्यालय स्थित क्रू लॉबी के समक्ष 27 मार्च को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) के बैनर तले लोको रनिंग कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता शाखा अध्यक्ष अभय कुमार भारती ने की।
इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए एआईएलआरएसए के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिनेश प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि लोको रनिंग स्टाफ हमेशा से रेल प्रशासन की मानवीय संवेदनहीनता और भेदभावपूर्ण नीतियों का शिकार रहा है। उन्होंने मुख्य मुद्दों को रेखांकित करते हुए कहा कि एक जनवरी 2024 से महंगाई भत्ते (डीए) में 50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अन्य विभागों के यात्रा भत्ता (टीए) में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन रनिंग स्टाफ के किलोमीटर अलाउंस (जिसका 70 प्रतिशत भाग टीए है) में अब तक कोई वृद्धि नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि रेल प्रशासन रनिंग स्टाफ से शत-प्रतिशत सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त रेल परिचालन की अपेक्षा तो रखता है, लेकिन उनके हकों की अनदेखी की जा रही है। ऐसी स्थिति में सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने रेलवे बोर्ड और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के उल्लंघन पर भी कड़ा रोष जताया। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि लोको पायलटों से लगातार 12 से 15 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है।
नियमों के विरुद्ध कर्मियों से लगातार 4-5 रातें ड्यूटी कराई जा रही है, जबकि बोर्ड के निर्देश सुरक्षा और मानवता के आधार पर 9 घंटे से अधिक कार्य न लेने के हैं। कहा गया कि जहाँ अन्य रेल कर्मियों को 50 से 56 घंटे का साप्ताहिक विश्राम मिलता है, वहीं रनिंग स्टाफ को मात्र 30 घंटे का विश्राम दिया जाता है, उसमें भी समय से पहले (28+2 नियम के तहत) ड्यूटी पर बुला लिया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार शरीर के लिए रक्त अनिवार्य है, उसी प्रकार रेलवे के संचालन में रनिंग स्टाफ की भूमिका अहम है। बावजूद इसके, जायज मांगों के लिए कर्मचारियों को बार-बार जंतर-मंतर और संसद मार्च जैसे आंदोलनों के लिए मजबूर किया जाता है। मौके पर एआईएलआरएसए सोनपुर शाखा कोषाध्यक्ष रघुनाथ चौधरी और शम्मी प्रकाश सहित कई अन्य कर्मियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और प्रशासन से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की मांग की।
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