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युग बोध संगोष्ठी में गूंजी स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव सिंह की विरासत

अतीत के गौरव से वर्तमान के संघर्ष तक की गाथा

​प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के ऐतिहासिक सबलपुर बभनटोली स्थित ब्रज किशोर सदन में 24 मई को युग बोध साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में वैचारिक चेतना का आयोजन किया गया। वैचारिक चेतना में विचारवानो का यहां महाकुंभ उमड़ पड़ा। विषय था स्वतंत्रता सेनानी स्व. ब्रह्मदेव सिंह की किसान आंदोलन में भूमिका।

सबलपुर बभनटोली में आयोजित यह संगोष्ठी केवल अतीत के पन्नों को पलटने का उपक्रम नहीं थी, बल्कि वर्तमान में सोनपुर-सबलपुर के किसानों के वजूद पर मंडराते टोपो लैंड के संकट और जमीन रजिस्ट्री पर लगी दमनकारी रोक के खिलाफ एक बौद्धिक और जनांदोलनकारी हुंकार थी। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने एक सुर में प्रतिध्वनित किया कि किसानों की रीढ़ को तोड़कर खड़ा किया गया विकास, दरअसल विकास नहीं बल्कि महाविनाश की प्रस्तावना है।

​इस विचार-मंथन की अध्यक्षता पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के मूर्धन्य सदस्य प्रो. चंद्रभूषण तिवारी ने की। मंच का कुशल संचालन सारथ्य संस्था के संयोजक अवध किशोर शर्मा ने संभाला।

​सम्मान और कृतज्ञता: माटी के नौ रत्नों का वंदन

​संस्था ने अपनी 41वीं संगोष्ठी की गौरवमयी परंपरा को जीवंत रखते हुए, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी निस्पृह सेवा देने वाली नौ विभूतियों को अंग वस्त्र से अलंकृत किया। किसान नेता ब्रज किशोर शर्मा द्वारा सम्मानित होने वाले व्यक्तित्वों में साहित्य सृजन के क्षेत्र में प्रसिद्ध साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी, सारंगधर प्रसाद सिंह, धर्म – अध्यात्म व साहित्य सेवा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय के अवकाश प्राप्त हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो.चंद्रभूषण तिवारी, क्रांतिकारी किसान विजय कुमार शर्मा, हरिहरक्षेत्र जनजागरण मंच के संस्थापक अवकाश प्राप्त बैंक कर्मी अनिल कुमार सिंह, अवकाश प्राप्त रेलकर्मी अमरनाथ तिवारी, अवकाश प्राप्त डाकबाबू शंभूनाथ शर्मा, पत्रकारिता क्षेत्र से मनीष कुमार एवं सोनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता धनंजय सिंह शामिल हैं।

​संगोष्ठी के अंतिम चरण में वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र मानपुरी, अवकाश प्राप्त बैंककर्मी अनिल कुमार सिंह, अवकाशप्राप्त रेलकर्मी अमरनाथ तिवारी, विजय कुमार शर्मा, शंभूनाथ शर्मा, सरपंच दिलीप सिंह, पूर्व मुखिया व भाजपा दक्षिणी मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा, अधिवक्ता अरविंद सिंह और शिक्षाविद प्रो.चंद्रभूषण तिवारी एवं सर्वेश्वर कुमार शर्मा सहित उपस्थित जनसमुदाय ने स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव सिंह, राम जीनिश सिंह, दरबारी सिंह और अमर शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी सहित सबलपुर के सभी 20 महान स्वतंत्रता सेनानियों व किसान सत्याग्रहियों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। ​इस ऐतिहासिक विमर्श के साक्षी बनने के लिए शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी के भतीजे व सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक प्रेमनाथ शर्मा, संजय कुमार शर्मा, अविनाश शर्मा, राजू सिंह, पप्पू शर्मा, मनोज शर्मा समेत सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और किसान उपस्थित थे।

*हम अदालत में भाषण नहीं देंगे, कागज देंगे-सुरेन्द्र मानपुरी*
इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना कलम आज उनकी जय बोल। को उद्धरित करते हुए कहा कि सबलपुर क्रांति एवं क्रांतिकारियों की धरती है। वर्ष 1938 -39 से 1942 के दौर में सारण, सोनपुर, सबलपुर के किसान अंग्रेजों व उनके जमींदारों – नवाबों से भिड़े थे। लाठियां खाईं, जेल गए, पर झुके नहीं। क्योंकि जमीन मां नहीं होती, जमीन मां ही होती है। कहा कि आज फिर वही लड़ाई है। नाम बदले हैं, नीयत नहीं बदली। उन्होंने इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि आजादी की जंग में वर्ष 1927 में रामप्रसाद बिस्मिल फांसी चढ़े, वर्ष 1931 में भगत सिंह शहीद हुए। वर्ष 1934 में रामदेव सिंह को फांसी दी गई। जुर्म क्या था? उन्होंने अंग्रेजों की गलत नीति के खिलाफ मनी एक्शन प्लान बनाया था।

आज हमारा कानूनी एक्शन प्लान है। वो खून देकर गए थे, ताकि हम कलम से लड़ सके। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सेतु के बाईपास पर कल तक मुआवजा बंट रहा था। आज उसी जमीन पर ताला लगा दिया। एक ही सरकार, दो कानून कैसे? संविधान कहता है – कानून सबके लिए बराबर। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार से ऊपर है। उन्होंने कहा कि पटना हाई कोर्ट के जानकार महेंद्र प्रताप पूछ रहे हैं कि जमीन चिन्हित किए बिना पूरे इलाके पर प्रतिबंध क्यों? 80 गांव बर्बाद होंगे, आधार क्या है? प्रमाण क्या है?

उन्होंने कहा कि हम अदालत में भाषण नहीं देंगे, कागज देंगे। क्योंकि कानून में लफ्फाजी नहीं चलती। रिकॉर्ड बोलता है और रिकॉर्ड कह रहा है कि बाईपास पर मुआवजा मिला है, तो यहां रोक अवैध है। कंपनी राज और अन्न संकट पर मानपुरी ने कहा कि हरदिया चौड़ सारण का अन्न भंडार था। 6 महीने का गेहूं देता था। आज वहां कंक्रीट के पिलर हैं। आई हॉस्पिटल के नाम पर 100 की जगह 600, बिहार के नाम पर 60 हजार करोड़, यह विकास है या सौदा? उन्होंने कहा कि अडानी समाजसेवी नहीं, मुनाफा खोजने वाला बनिया है।

जहां हवाई अड्डा, सेटेलाइट सिटी बनता है, वहां किसान उजड़ता है। किसान अपनी जमीन बेचकर उसी में मजदूर बन जाता है। सुन लो जब खेती की जमीन खत्म होगी तो ऑस्ट्रेलिया से गेहूं मंगाओगे? अन्न के मामले में फिर गुलाम बनोगे? हम विकास के विरोधी नहीं। पर 4 गुना मुआवजा भीख है। हमें चाहिए सम्मान – पुनर्वास और हर किसान परिवार से एक को सरकारी नौकरी।

उन्होंने कहा कि सबलपुर से सैदपुर तक, हर किसान के पास कागज है। रजिस्टर 1-2 में नाम दर्ज है। जसवंत राय के जमाने से लगान देते आए हैं। आज उसी किसान को बेदखल कर रहे हो? उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये कलेक्टर वाला धोखा बंद करो। जब ब्लॉक में 6 महीने फाइल नहीं सरकती, तो कलेक्टर 5 दिन में क्या न्याय देगा? ये प्रतिबंध नहीं, साजिश है। इसलिए ऐलान है कि लड़ाई सड़क पर भी होगी, अदालत में भी होगी। सन् 1942 वाले लाठी खाकर लड़े थे, हम कागज लेकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि 80 साल का हिसाब है। सबलपुर अब आंदोलन की भूमि बनेगा। कार्यक्रम का समापन शिक्षक नेता मुकेश कुमार शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया, जिसने उपस्थित जनमानस में अपने अधिकारों के प्रति एक नई अलख जगाने का काम किया।

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