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संगमधाम सबलपुर (सोनपुर) में आस्था का महासंगम

भव्य गंगा महाआरती और कथा से आलोकित हुआ सुखदेव घाट

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। ​त्रिवेणी संगम महोत्सव के तीसरे दिन 25 मई को सारण जिला के हद में संगम धाम सबलपुर (सोनपुर) का सुखदेव घाट आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन संस्कृति की दिव्य छटा से सराबोर हो उठा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंख ध्वनि और सैकड़ों दीपों के बीच पंडित अभिषेक एवं सहयोगियों द्वारा आयोजित भव्य त्रिवेणी गंगा महाआरती ने उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने मां गंगा, मही और नारायणी नदी की आराधना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

​इस पावन अवसर पर बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल के अध्यक्ष सह लोक सेवा आश्रम के महंत संत विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा, संघ के प्रचारक संत इन्द्रपालजी महाराज, महंत प्रकाश गिरिजी महाराज, आर्य समाज के स्वामी ब्रह्मानंद, संजय दास, संत कंचन दासजी महाराज और परशुरामजी सहित देश के विभिन्न कोनों से आए पूज्य संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ।

​सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लोक परंपरा को जीवंत करते हुए स्कूली छात्राओं ने पारंपरिक झिझिया नृत्य और राधा-कृष्ण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इसके उपरांत, इस्कॉन के प्रचारक संत सीता रामेश्वर दासजी महाराज ने संगम महात्म्य पर भावपूर्ण कथा का वाचन करते हुए मानव जीवन में संगम स्नान और सनातन संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।
​महोत्सव के दौरान सबलपुर के सजग रहिवासियों और आयोजन समिति द्वारा क्षेत्र के कायाकल्प के लिए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से संतों के समक्ष रखे गए, जिससे गंगा दशहरा को 26 मई को पारित होने की संभावना है।

​अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सबलपुर संगम धाम को त्रिवेणी संगम स्थल के रूप में विकसित करना उक्त मांग का उद्देश्य है। साथ ही ​बाढ़ व कटाव से सुरक्षा के मद्देनजर गंगा और नारायणी के प्रकोप से सबलपुर को बचाने के लिए प्रस्तावित उत्तरी गंगा अम्बिका पथ के डीपीआर में सबलपुर के सभी नदी तटों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की भी मांग उठी। इन प्रस्ताव को धर्म संसद में पारित किया जायेगा।
​संगम की महिमा से प्रेरित होकर स्थानीय धर्मानुरागी अनिल सिंह गौतम ने प्रत्येक पूर्णिमा को नियमित गंगा आरती हेतु पूजन चौकियां एवं सामग्रियां दान करने की घोषणा की, जिसका संत समाज ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

मातृशक्ति ने किया ईंट दान और श्रमदान

इधर ​महोत्सव के समानांतर चल रहे पुरुषोत्तम मास अनुष्ठान में श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला और हरिनाम संकीर्तन की महिमा गूंज रही है। इस्कॉन के सुप्रसिद्ध कथावाचक सीता रामेश्वर दास महाराज ने पर्यावरण संरक्षण, गौ-सेवा और अहंकार मुक्ति का संदेश दिया। ​इस आयोजन की सबसे अनुपम तस्वीर तब सामने आई जब स्थानीय मातृशक्ति ने संगम घाट निर्माण का संकल्प लेते हुए ईंट दान किया।

महिलाओं ने सामूहिक सहभागिता की मिसाल पेश करते हुए पूरे प्रवचन पंडाल को गाय के गोबर से लीपकर स्वच्छता और भारतीय संस्कृति का संदेश दिया। वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि इस ऐतिहासिक स्थल पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाएं जल्द बहाल की जाएं।

कलश यात्रा से हुआ था शंखनाद, आज संगम पर जुटेगा महाकुंभ

ज्ञात हो कि ​विगत 23 मई को आचार्य रमेश तिवारी के सानिध्य में भव्य कलश यात्रा और शिव चर्चा के साथ इस महोत्सव का शंखनाद किया गया था। हिन्दू जागरण के बिहार-झारखंड क्षेत्र संयोजक विनोद सिंह यादव सहित अन्य प्रबुद्ध वक्ताओं ने लगातार वैचारिक जागृति से समाज को जोड़ा है।महोत्सव समिति के अध्यक्ष राम विनोद राय, प्राचार्य अनिल कुमार शाह व समस्त पदाधिकारियों ने बताया कि गंगा दशहरा के महापर्व पर नेपाल से लेकर हरिहरक्षेत्र सोनपुर तक के हजारों साधु-संत और गृहस्थ यहां जुटेंगे। इस दिन पवित्र संगम स्नान, महा भंडारा और दर्शनार्थियों को पावन संगम जल एवं संगम रज (मृत्तिका) भेंट कर विदा करने का महा-अभियान चलाया जाएगा। यह महोत्सव अब केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बन गया है।

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