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अध्यात्म व् आस्था का संगम: सबलपुर में चार दिवसीय गंगा त्रिवेणी संगम महोत्सव संपन्न

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। गंगा दशहरा और गंगा अवतरण दिवस के पावन अवसर पर सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के ऐतिहासिक गंगा त्रिवेणी संगम धाम सबलपुर में विगत चार दिनों से चल रहे भव्य त्रिवेणी संगम महोत्सव का 26 मई को समापन हो गया। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर इस महोत्सव के अंतिम दिन देश के विभिन्न अंचलों से आए संतों और हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई।

बीते 23 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ यह अनुष्ठान अब क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक चेतना का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। महोत्सव का ऐतिहासिक क्षण वह था जब सनातन धर्म के विभिन्न पंथों, मतों और संप्रदायों से जुड़े संतों व विद्वानों ने एक स्वर में अपने हाथों में संगम का पवित्र जल लेकर सबलपुर को मूल गंगा त्रिवेणी संगम धाम घोषित किया। इससे पूर्व, संतों और श्रद्धालुओं ने दर्जनाधिक नौकाओं पर सवार होकर इस अलौकिक संगम स्थल का दृश्यावलोकन और पूजन किया।

धर्म संसद में दो ऐतिहासिक धर्म प्रस्ताव पारित

​महोत्सव के दौरान आयोजित संत सम्मेलन सह धर्म संसद की अध्यक्षता स्थानीय सरपंच राजेंद्र सिंह ने की। धर्म संसद में क्षेत्र के सांस्कृतिक और भौतिक विकास के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए, जिनमें सबलपुर संगम धाम को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर त्रिवेणी संगम स्थल के रूप में स्थापित व विकसित करना ​एवं बाढ़ व भीषण कटाव से सुरक्षा हेतु प्रस्तावित उत्तरी गंगा अंबिका पथ के डीपीआर में सबलपुर के तीनों नदी तटों को अनिवार्य रूप से शामिल करना शामिल है।

​कार्यक्रम के मुख्य संयोजक (हिंदू जागरण मंच, बिहार-झारखंड) विनोद सिंह यादव ने उपरोक्त प्रस्तावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संकल्प इस पवित्र क्षेत्र के समग्र विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
​महोत्सव के तीसरे दिन सुखदेव घाट पर भव्य त्रिवेणी गंगा महाआरती का आयोजन किया गया जिसने उपस्थित जनमेदिनी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर स्थानीय स्कूली छात्राओं द्वारा पारंपरिक झिझिया और राधा-कृष्ण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। वहीं, इस्कॉन के विख्यात प्रचारक व कथा व्यास सीतारामेश्वर दास ने संगम महात्म्य पर प्रवचन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर सबलपुर ​संगम स्थल पर निर्मित विशाल पंडाल वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

आचार्य राजेश तिवारी के आचार्यत्व में संपन्न मुख्य अनुष्ठान के बाद हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने संगम स्नान कर वहां बने अस्थाई हवन कुंडों में पूर्णाहूति दी। महोत्सव में जन-सहयोग और मातृशक्ति का अनूठा रूप देखने को मिला। स्थानीय महिलाओं ने घाट निर्माण के संकल्प के साथ ईंटें दान कीं और पूरे पंडाल परिसर को गाय के गोबर से लीपकर पवित्रता व स्वच्छता का संदेश दिया। इसी संकल्पित ईंटों और धर्मानुरागी अनिल सिंह गौतम द्वारा प्रदत्त बोर्ड के माध्यम से संगम धाम के शिलापट्ट की आधारशिला रखी गई, जिस पर संतों ने पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद दिया। साथ ही गौतम ने हर पूर्णिमा को नियमित गंगा आरती की सामग्री दान करने की घोषणा की।

​ महाकुंभ में सनातन संस्कृति की सर्व समावेशी भावना की झलक दिखी। कार्यक्रम में उदासीन महामंडल, आर्य समाज, इस्कॉन, सिख, कबीर, नागा, वैष्णव तथा किन्नर समुदाय से आए दो सौ से अधिक संतों का सर्वप्रथम पद-प्रक्षालन (पैर धोकर) किया गया और उन्हें अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। ​मंच पर मुख्य रूप से बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल के अध्यक्ष संत विष्णु दास उदासीन (मौनी बाबा), आर्य समाज दिल्ली के स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती और संत इंद्रपाल सिंहजी महाराज आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन विनोद यादव ने किया।

​महोत्सव के अंतिम दिन 26 मई को विशाल भगवद् भंडारे का आयोजन किया गया। कोई भी श्रद्धालु बिना प्रसाद लिए न लौटे, इसके लिए दो दर्जन से अधिक महाप्रसाद एवं शर्बत वितरण केंद्र बनाए गए थे। ​इस अवसर पर छह पुरुषों और पांच महिलाओं के एक विशेष नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने सभी पूज्य संतों को अगले वर्ष पुनः पधारने का आमंत्रण दिया। संतों ने सहर्ष अपनी स्वीकृति देते हुए अगले वर्ष समागम को एक भव्य शोभायात्रा के रूप में आयोजित करने का आशीर्वाद दिया। अंत में, उपस्थित समस्त समाजसेवियों, स्थानीय स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने इस संगम धाम के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे भविष्य में और अधिक भव्य स्वरूप देने का सामूहिक संकल्प लिया।

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