रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की ओर से गंगा दशहरा के पावन अवसर पर 25 मई को बोकारो की पौराणिक गरगा नदी (गर्ग-गंगा) का पूजन एवं आरती कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बोकारो जिला उपायुक्त, चास नगर निगम, बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से गरगा नदी को प्रदूषण एवं अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई।
संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने इस अवसर पर कहा कि गरगा नदी का उद्गम बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड स्थित कलौंदी बांध जलकुंड से हुआ है। पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में गर्ग ऋषि ने यहां यज्ञ के दौरान गंगा जल उपलब्ध कराने के लिए अपने तपोबल से भू-गर्भ से जलधारा उत्पन्न की थी, जिसे गर्ग-गंगा कहा गया और कालांतर में यही गरगा नदी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
उन्होंने कहा कि गरगा डैम से निकलकर जैसे ही यह नदी बोकारो इस्पात नगर एवं चास क्षेत्र में प्रवेश करती है, वैसे ही इसके किनारे बसे सिवनडीह, मखदुमपुर, रितुडीह, सोनाटांड, बारी कॉपरेटिव, बाघरायबेड़ा समेत चास नगर निगम और बोकारो इस्पात नगर की विभिन्न आवासीय कॉलोनियों के गंदे नालों का पानी लगातार इसमें प्रवाहित किया जाता है। इससे नदी का जल अत्यधिक प्रदूषित हो गया है और कई स्थानों पर दुर्गंध फैलने लगी है। साथ ही नदी के कई हिस्सों में अतिक्रमण भी किया जा चुका है।
मुकुल ओझा ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान पिछले दो दशकों से गरगा नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए आंदोलन एवं जनजागरण अभियान चला रहा है, लेकिन अब तक चास नगर निगम, जिला प्रशासन, राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जल प्रदूषण एक दंडनीय अपराध है। यदि समय रहते इसपर पहल नहीं हुई तो यह ऐतिहासिक नदी पूरी तरह समाप्त हो सकती है। गरगा पूजन सह आरती कार्यक्रम में मुख्य रूप से शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, अखिलेश ओझा, अभय कुमार गोलू, मृणाल चौबे, अनुराग, वीरेंद्र चौबे, पप्पू चौबे, अशोक पांडेय सहित कई पर्यावरण प्रहरियों ने भाग लिया।
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