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बोकारो का आयुर्वेद मॉडल बना देश के लिए मिसाल

झारखंड के हर जिले में विकसित होंगे औषधीय उद्यान-एनएचएम निदेशक

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड का बोकारो जिला कोयला, इस्पात के साथ साथ अब आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक शशि प्रकाश झा ने बीते 27 जुलाई को पंचकर्म सह सेवा केंद्र का निरीक्षण करते हुए यहां विकसित किए जा रहे आयुर्वेदिक औषधीय उद्यान और जोंक चिकित्सा आधारित नवाचार की खुलकर सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे औषधीय उद्यान आयुर्वेदिक एवं औषधीय पौधों के संरक्षण के साथ-साथ आम जनों को उनके औषधीय गुणों और उपयोग की जानकारी देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद एवं प्राकृतिक उपचार पद्धति को समान रूप से आवश्यक बताते हुए कहा कि हमारे आसपास उपलब्ध कई औषधीय पौधे गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
निरीक्षण के दौरान निदेशक ने परिसर के पीछे स्थित गड्ढे का भी जायजा लिया, जहां आयुष पदाधिकारी डॉ विक्रम ने जोंक चिकित्सा (लीच थेरेपी) और मछली पालन की संयुक्त योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जोंक आयुर्वेदिक उपचार में उपयोगी है, जबकि मछलियां मच्छरों के लार्वा को नष्ट कर रोग नियंत्रण में मदद करेंगी। इस अभिनव पहल की भी निदेशक ने सराहना की।

मौके पर एनएचएम निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि बोकारो जिले में अब तक 10 आयुष अस्पताल स्थापित किए जा चुके हैं तथा 28 नए आयुष अस्पतालों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक आयुष सेवाओं का व्यापक विस्तार होगा। इस दौरान स्वदेशी कृषि प्रकोष्ठ झारखंड के प्रमुख ए.के. सिन्हा, जिला आयुष पदाधिकारी डॉ शिव शंकर पांडेय, डॉ विक्रम, डीपीएम मयंक मंजुल, पवन श्रीवास्तव, मनीष कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र तिवारी, आकर्ष पांडेय, आरती सिन्हा, सरिता श्रीवास्तव, धीरेन प्रसाद रजवार, सुदर्शन, अभय कुमार, संत कुमार, बिमल कुमार मिश्रा, दयानंद परमार, गौरी शंकर सिंह सहित अनेक गणमान्य मौजूद रहे।

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