एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। लीचीपुरम अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता के नेतृत्व में 22 मई को मुजफ्फरपुर में एक नई सांस्कृतिक परंपरा की शुरुआत की गई, जिसमें लीची फल तोड़ने से पहले प्रकृति देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया गया तथा लोक कला, लोक गायन और वादन के साथ लीची फल के स्वागत का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर लीची बगान में स्थानीय लोक कलाकार सुनील कुमार, सुमन कुमारी, अनिता कुमारी एवं आदित्य सुमन द्वारा लिच्छीपुरम की प्रकृति देवी को प्रसन्न करने हेतु लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ लीची फल तोड़ने की परंपरा का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर कठपुतली कलाकार सुनील कुमार द्वारा रचित लीची गीत पुस्तिका का लोकार्पण राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के मलंग स्थान पर अभियान के संस्थापक पर्यावरणविद सुरेश गुप्ता की प्रेरणा से संपन्न किया गया। ज्ञात हो कि, भारतीय संस्कृति में पंजाब, उड़ीसा, असम, झारखंड सहित अनेक राज्यों में नई फसल के आगमन पर लोक गायन, नृत्य और प्रकृति पूजन के साथ फसल का स्वागत करने की समृद्ध परंपरा रही है। उसी सांस्कृतिक विरासत को लिच्छीपुरम संस्कृति से जोड़ने का यह एक विनम्र प्रयास है।
अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता के अनुसार भविष्य में और भी कलाकार इस अभियान से जुड़ेंगे तथा लीची पूजन, मुस्कान और प्रकृति प्रेम की इस परंपरा को लोक कला एवं संस्कृति के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मीठा मुस्कुराने के लिए साधुवाद, लोक कलाकारों के प्रति आभार, जिन्होंने इस सांस्कृतिक अभियान में अपना समय, सहयोग और अपना समर्पण दिया है।
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