अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के निकटवर्ती 24वें जैन तीर्थंकर वर्धमान महावीर की जन्मभूमि वैशाली में तीन दिवसीय वैशाली महोत्सव के अंतिम दिन 2 अप्रैल को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की ऐसी त्रिवेणी बही कि पूरा परिसर जनसैलाब से सराबोर हो गया। लोकगीत, सूफी गायन, हास्य और भजनों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर रात तक अपनी कुर्सियों से बांधे रखा।
भजन सम्राट की प्रस्तुति: ‘कभी अलविदा न कहना’ पर झूमे श्रोता
वैशाली महोत्सव के समापन दिवस की संध्याकालीन सत्र का मुख्य आकर्षण विख्यात भजन सम्राट अनूप जलोटा रहे। उन्होंने अपनी चिर परिचित शैली और मधुर स्वर से पूरे वातावरण को भक्ति के रस में डुबो दिया। जब उन्होंने कभी अलविदा न कहना के स्वर छेड़े, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। जिलाधिकारी वैशाली वर्षा सिंह ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।

जिलाधिकारी सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव में स्थानीय और नामचीन कलाकारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का आगाज़ रूपक कुमार ठाकुर के लोकगीतों से किया गया। इसके पश्चात कुमारी रीना, भवानी शेखर, संजीत कुमार यशस्वी, मोनी झा और सुमित श्रीबाबा ने लोकगीतों की मधुर प्रस्तुतियां दी। भागलपुर के अंग हेरिटेज एंटरटेनमेंट ने सूफी गायन से रूहानियत बिखेरी, वहीं नालंदा संगीत कला विकास संस्थान के कलाकारों ने लोकनृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कॉमेडियन रविंद्र जॉनी ने अपनी चुटीली कॉमेडी और व्यंग्य से दर्शकों को लोटपोट कर दिया।

महोत्सव के प्रथम सत्र में डॉ नंदेश्वर सिंह के कुशल संचालन में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जहाँ कवियों ने अपनी रचनाओं से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया। पूरे कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सतीश कुमार साथी एवं उमेश कुमार प्रसाद सिंह ने किया। समापन अवसर पर जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि वैशाली महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है। ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना और अपनी परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखना है। उन्होंने महोत्सव की सफलता के लिए कलाकारों, आयोजन समिति और अनुशासित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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