एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। वंदे मातरम् पर कांग्रेस के खिलाफ झूठा राष्ट्रद्रोही नैरेटिव बंद करे भाजपा। वंदे मातरम् भाजपा की जागीर नहीं, कांग्रेस और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत है। भाजपा पहले अंग्रेजी राज के दौर का अपना इतिहास देश को बताए, फिर कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र बांटे।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 21 अगस्त को वंदे मातरम् को लेकर भाजपा के हमले पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा इतिहास को तोड़-मरोड़कर कांग्रेस को राष्ट्रद्रोही साबित करने की घटिया राजनीतिक साजिश बंद करे। उन्होंने कहा कि भाजपा को वंदे मातरम् पर कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति का प्रमाण-पत्र देने से पहले अपने और आरएसएस के अंग्रेजी शासनकाल के इतिहास का हिसाब देश को देना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि आंकड़े और इतिहास भाजपा के झूठ को बेनकाब करता है। उन्होंने एतिहासिक साक्ष्यो का सबूत पेश करते हुए कहा कि वर्ष 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् गाया। वर्ष 1905 में बंग-भंग विरोधी स्वदेशी आंदोलन में वंदे मातरम् अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध का शक्तिशाली प्रतीक बना। वर्ष 1937 में कांग्रेस ने राष्ट्रीय आयोजनों के लिए वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों को स्वीकार किया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान देने की घोषणा की। वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार किया और आंदोलन को कठोरता से कुचला।
कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि जिस कांग्रेस को आज भाजपा वंदे मातरम् विरोधी बता रही है, उसी कांग्रेस के मंच से यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का आवाज बना। भाजपा बताए कि वर्ष 1896, 1905 और 1950 में कांग्रेस राष्ट्र विरोधी कैसे हो गई? कहा कि आज आरएसएस के अंग्रेजी राज वाले अध्याय पर भी बहस होनी चाहिए, ताकि देश की जनता को यह पता चल सके कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में आरएसएस की संगठनात्मक भूमिका पर ब्रिटिश प्रशासन के रिकॉर्ड भाजपा के राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। तत्कालीन बॉम्बे सरकार की रिपोर्ट में आरएसएस के आंदोलन से दूर रहने और कानून के भीतर रहने का उल्लेख मिलता है।
नायक ने भाजपा को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस के हजारों नेता और कार्यकर्ता अंग्रेजों की जेलों में थे। जनता सड़कों पर थी। देश अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहा था। उस समय आरएसएस की संगठनात्मक भूमिका क्या थी। इसका भाजपा को जवाब देना चाहिए। जिसने अंग्रेजो से माफ़ी और पेंशन लेने का काम किया था। आज भाजपा उसे वीर कहती है और कांग्रेस उसे माफ़ी वीर कहती है।
कहा कि कितने स्वतंत्रता आन्दोलन के वीर क्रांतिकारियों को आरएसएस ने अंग्रेजो से मिलकर गिरफ्तारी कराने का कार्य करते थे। आज उनकी औलादें राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा जिस वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस को राष्ट्रद्रोही कह रही है, उसी गीत को कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिरोध की आवाज बनाया था। राष्ट्रभक्ति का इतिहास 2026 में भाजपा के मंच से नहीं लिखा जाएगा।
कहा कि भाजपा और आरएसएस को जनता को यह भी बताना चाहिए कि स्वतंत्रता आंदोलन के निर्णायक दौर में उनका संगठनात्मक योगदान क्या था और कांग्रेस का योगदान क्या था। भाजपा इतिहास की किताब खोलकर पढ़े। वंदे मातरम् कांग्रेस की विरासत है, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत है। इसे भाजपा की चुनावी जागीर बनाकर कांग्रेस को राष्ट्रद्रोही बताने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।
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