एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। राम के नाम पर वोट, मंदिरों के नाम पर नोट। भाजपा बताए कि आस्था का हिसाब कब देगी? भगवान के नाम पर राजनीति, चंदे पर चुप्पी और विवादों पर पर्दा क्या यही भाजपा का रामराज्य है? उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 4 जुलाई को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर सत्ता तक पहुंचने वाली भारतीय जनता पार्टी आज करोड़ों रामभक्तों के सबसे बड़े सवाल से बच रही है। देश जानना चाहता है कि भगवान के नाम पर जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के चंदे का पूरा और पारदर्शी हिसाब जनता के सामने कब रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जो सरकार गरीब के बैंक खाते, किसान की सब्सिडी, छोटे दुकानदार के लेन-देन और आम रहिवासियों के प्रत्येक रुपये का हिसाब मांगती है, वही सरकार राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों पर मौन क्यों है? यदि सरकार और संबंधित संस्थाओं के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक लेखा-जोखा से परहेज क्यों?
नायक ने कहा कि अयोध्या भूमि खरीद विवाद को लेकर गंभीर आरोप सार्वजनिक हुए, जिनमें कुछ ही मिनटों के भीतर भूमि की कीमत में असामान्य वृद्धि के दस्तावेज सामने आए। देश ने सवाल पूछे, लेकिन आज तक इन विवादों पर ऐसी पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आई, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में उठे संदेह पूरी तरह दूर हो सके।
नायक ने कहा कि उज्जैन के महाकाल लोक कॉरिडोर का भव्य उद्घाटन होने के कुछ ही महीनों बाद मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और परियोजना प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। इसी प्रकार केदारनाथ धाम में सोना मढ़ाई से जुड़े विवाद, तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसादम की गुणवत्ता को लेकर उठे प्रश्न, काशी विश्वनाथ धाम परियोजना में प्राचीन धार्मिक संरचनाओं के संरक्षण पर विवाद, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार और परिक्रमा परियोजना से जुड़े मुद्दे तथा चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना पर पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में अनेक सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आज भाजपा हर चुनाव में धर्म और आस्था की राजनीति करती है, लेकिन जब धार्मिक परियोजनाओं से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय करने की बात आती है, तब वह चुप्पी साध लेती है।
विज्ञप्ति में नायक ने भाजपा से तीन सीधे सवाल पूछे है राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे का स्वतंत्र एवं सार्वजनिक ऑडिट आज तक क्यों नहीं कराया गया? धार्मिक परियोजनाओं में उठे गंभीर विवादों और आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है? तथा आस्था के नाम पर सवाल पूछने वाले श्रद्धालुओं और आमजन को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति क्यों अपनाई जा रही है?
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सत्य, मर्यादा, न्याय और पारदर्शिता के प्रतीक हैं। इसलिए उनके नाम पर राजनीति करने वालों को भी उन्हीं मूल्यों का पालन करना चाहिए। भगवान के नाम का उपयोग किसी भी प्रकार से जवाबदेही से बचने का माध्यम नहीं बन सकता। नायक ने कहा कि आज देश की जनता को मंदिर-मस्जिद, भावनात्मक नारों और धार्मिक ध्रुवीकरण में उलझाकर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
कैमरों के सामने धार्मिक भव्यता दिखाई जाती है, लेकिन पर्दे के पीछे उठ रहे सवालों पर लगातार चुप्पी है। उन्होंने भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से मांग की कि यदि उन्हें अपनी नीयत और व्यवस्था पर भरोसा है, तो राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे, प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों और बड़ी धार्मिक परियोजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराकर पूरा विवरण देश के सामने सार्वजनिक करें।
नायक ने कहा कि देश का सनातनी समाज आस्था का सम्मान चाहता है, आस्था के नाम पर राजनीति नहीं। पारदर्शिता चाहता है, प्रचार नहीं। जवाबदेही चाहता है, जुमले नहीं। कहा कि भगवान के नाम पर वोट मांगने वालों को अब भगवान के नाम पर जुटाए गए प्रत्येक रुपये का हिसाब भी देश की जनता को देना होगा। यही लोकतंत्र की भावना है। यही धर्म की मर्यादा है और यही करोड़ों श्रद्धालुओं की अपेक्षा भी है।
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