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लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए निरंतर संघर्ष की राजनीति का दूसरा नाम राहुल गांधी-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। अपनी लंबी पदयात्रा से देश के संसद तक देश की जनता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए निरंतर संघर्ष की राजनीति का दूसरा नाम राहुल गांधी है। उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 18 जून को कही।

नायक ने कहा कि 19 जून केवल राहुल गांधी का जन्मदिन नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में उस वैचारिक संघर्ष को याद करने का अवसर भी है, जिसमें सत्ता से अधिक महत्व संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक न्याय और आम देशवासियों की आवाज़ को दिया जाता है। कहा कि आज जब राहुल गांधी अपना 56वाँ जन्मदिन मना रहे हैं, तब देश की राजनीति के उस दौर पर भी विचार करना आवश्यक है, जहाँ एक ओर सत्ता का अभूतपूर्व केंद्रीकरण दिखाई देता है, तो दूसरी ओर विपक्ष के रूप में राहुल गांधी लगातार जनता के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने का प्रयास करते रहे हैं।

प्रदेश प्रवक्ता नायक ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिसने स्वतंत्र भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान केवल विरासत के आधार पर स्थापित करने का प्रयास नहीं किया। पिछले एक दशक में उन्होंने जनता के बीच जाकर संवाद, संघर्ष और जनसंपर्क की राजनीति को प्राथमिकता दी। व्यक्तिगत आलोचनाओं, राजनीतिक हमलों और लगातार चलने वाले दुष्प्रचार के बावजूद उन्होंने बेरोज़गारी, महँगाई, किसानों की समस्याओं, शिक्षा, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा जैसे मुद्दों को लगातार उठाया।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जब कोई राष्ट्रीय नेता हज़ारों किलोमीटर पैदल चलकर देश के अलग-अलग राज्यों में आमजनों से सीधे संवाद करे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उसके बाद भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने करोड़ों देशवासियों से सीधा संपर्क स्थापित किया। इन यात्राओं में बेरोज़गार युवाओं, किसानों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, छोटे व्यापारियों और समाज के वंचित वर्गों की समस्याएँ प्रमुखता से सामने आईं।

नायक ने कहा कि राहुल की इन यात्राओं ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि राजनीति केवल चुनावी सभाओं और सोशल मीडिया अभियानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा को समझने और उसे राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने का माध्यम भी होनी चाहिए।
नायक ने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में गिना जाता है, लेकिन यही युवा सबसे अधिक रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की चिंता से जूझ रहा है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब, सरकारी पदों पर रिक्तियाँ और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण ने लाखों परिवारों को प्रभावित किया है। कहा कि राहुल गांधी लगातार यह कहते रहे हैं कि शिक्षा व्यापार का नहीं, अधिकार का विषय होनी चाहिए। उनका तर्क रहा है कि यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित रह जाएगी, तो सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ और गहरी होंगी। इसी प्रकार रोजगार के अवसरों का विस्तार किए बिना भारत की युवा शक्ति का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में किसानों और ग्रामीण समाज की भूमिका आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेती की बढ़ती लागत, मौसम संबंधी चुनौतियाँ और आय की अनिश्चितता किसानों के सामने गंभीर प्रश्न बने हुए हैं। राहुल गांधी ने विभिन्न मंचों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कृषि क्षेत्र में निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

नायक के अनुसार किसान आंदोलनों के दौरान भी उन्होंने किसानों की बात को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को सुनना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है। कहा कि राहुल गांधी के राजनीतिक भाषणों और अभियानों का एक प्रमुख विषय भारतीय संविधान रहा है। उनका कहना है कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।

न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक आदर्शों को वे भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। राहुल ने बार-बार यह तर्क रखा है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि स्वतंत्र संस्थाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की रक्षा से सुनिश्चित होती है।

नायक ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में केंद्र सरकार ने विकास, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढाँचे और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को लेकर अनेक दावे किए हैं। दूसरी ओर विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी ने बेरोज़गारी, महँगाई, आर्थिक असमानता, शिक्षा, परीक्षा प्रणाली, किसानों की समस्याओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर सरकार से लगातार सवाल पूछे हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का कहना रहा है कि लोकतंत्र में सरकार से प्रश्न पूछना विरोध नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने का संवैधानिक दायित्व है। उनका यह भी मत रहा है कि किसी भी सरकार की सफलता का मूल्यांकन केवल बड़े घोषणा पत्रों से नहीं, बल्कि आम जन के जीवन में आए वास्तविक सुधार से होना चाहिए।

नायक के अनुसार झारखंड प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासी विरासत और सामाजिक विविधता का प्रदेश है। यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे विशेष महत्व रखते हैं। राहुल ने विभिन्न अवसरों पर आदिवासी समाज के अधिकारों, संवैधानिक सुरक्षा और समावेशी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है। कहा कि कांग्रेस की राजनीति भी लंबे समय से सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण को अपने प्रमुख सिद्धांतों में शामिल करती रही है। ऐसे में झारखंड जैसे राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

नायक ने कहा कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज को बेहतर दिशा देना होना चाहिए। कहा कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सरकार और विपक्ष दोनों जनता के प्रति जवाबदेह हों, जब असहमति का सम्मान हो और जब संविधान सभी निर्णयों का मार्गदर्शक बने। कहा कि राहुल गांधी की राजनीति का केंद्रीय संदेश यही रहा है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता, लोकतांत्रिक परंपरा और संविधान है।

वे बार-बार संवाद, सामाजिक सद्भाव और समान अवसरों की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं। कहा कि राहुल का 56वाँ जन्मदिन केवल एक राजनीतिक नेता के जीवन का एक और वर्ष नहीं है। यह उस विचारधारा, उस संघर्ष और उस लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है जो जनता की आवाज़, सामाजिक न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को राजनीति के केंद्र में रखने की बात करती है।

कहा कि आज भारत के सामने रोजगार, शिक्षा, कृषि, आर्थिक असमानता और सामाजिक समरसता जैसी अनेक चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल चुनावी नारों से नहीं, बल्कि जनकेंद्रित नीतियों, संवैधानिक मूल्यों और जवाबदेह शासन से ही संभव है। नायक ने कहा कि वे राहुल गांधी को उनके 56वें जन्मदिन पर कामना करते हैं कि वे स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और भारत के लोकतांत्रिक, समावेशी तथा संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों में निरंतर आगे बढ़ते रहें। कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष, जनसंवाद और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता भारत की सबसे बड़ी ताकत है। यही संदेश इस अवसर पर सबसे अधिक प्रासंगिक है।

झारखंड में 18 जून को संपन्न राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की करारी हार के सवाल पर नायक ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस विधायकों ने अपनी चट्टानी एकता का परिचय दिया है, बावजूद इसके राजद व् भाकपा माले विधायक ने धोखा दिया है। कहा कि चुनाव में धनबल सामाजिक न्याय और सिद्धांतो पर भारी रहा है।

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