Advertisement

आस्था का महाकुंभ: सोमवती अमावस्या पर सोनपुर व् हाजीपुर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर 15 जून को सारण एवं वैशाली जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर और हाजीपुर का संपूर्ण इलाका भक्ति के रंग में सराबोर दिखा। गंगा और नारायणी (गंडक) के पवित्र संगम तटों से लेकर देवाधिदेव महादेव के दरबार तक आस्था का ऐसा विहंगम नजारा दिखा, मानो साक्षात देवताओं का हुजूम धरती पर उतर आया हो।

जानकारी के अनुसार अहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू श्रद्धालुओं का रेला देर शाम तक अनवरत चलता रहा। ​सुबह के ठीक 4 बजे जब आसमान में भोर की लालिमा बिखर रही थी, तभी से कालीघाट (सोनपुर), पहलेजा घाट और हाजीपुर के ऐतिहासिक कौनहारा घाट पर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। पीली, लाल और केसरिया साड़ियों में सजी सुहागिन महिलाएं और पारंपरिक धोती-कुर्ते में पुरुष नारायणी एवं गंगा की लहरों के बीच डुबकी लगाते नजर आए।

विभिन्न नदी ​घाटों पर सजी रंग-बिरंगी छतरियों के नीचे बैठकर श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूरी श्रद्धा से तर्पण किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन इस पावन संगम में स्नान करने से हजार गौ-दान के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

शिवालयों में गूंजा हर-हर महादेव: हरिहरनाथ और पतालेश्वर नाथ में जलाभिषेक

बताया जाता है कि पवित्र गंगा और ​नारायणी नदी से स्नान कर भीगे वस्त्रों में ही भक्तों की कतारें सीधे मंदिरों की ओर मुड़ गई। संपूर्ण वातावरण हर हर महादेव और जय श्रीहरि के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान ​बाबा हरिहरनाथ धाम सोनपुर तीर्थयात्रियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा, क्योंकि यहां हरि और हर (विष्णु और शिव) का एक ही मंडप में अलग -अलग विग्रह स्थापित है।

शैव और वैष्णव परंपरा के इस अनूठे मिलन स्थल पर लाखों भक्तों ने जल, दूध, बेलपत्र और अक्षत अर्पित कर जलाभिषेक किया। वहीं हाजीपुर नगर के प्राचीन मंदिर ​बाबा पतालेश्वर नाथ मंदिर में भी भक्तों का भारी हुजूम उमड़ा, जहां श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महादेव की पूजा-अर्चना की।
सोनपुर स्थित ​कालीघाट के समीप स्थित प्राचीन पीपल वृक्ष के समीप का दृश्य अत्यंत मनोहारी था। यहां सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए मौन व्रत रखा। स्नान के पश्चात महिलाओं ने पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित किया और उसके चारों ओर 108 बार कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की।

हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री के अनुसार पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। सोमवती अमावस्या पर इसकी पूजा करने से पितृ दोष और कालसर्प दोष जैसी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। कहा कि ​यह वही पावन भूमि है जहां पौराणिक काल में भगवान विष्णु ने अपने भक्त गज’ (हाथी) को ग्राह’ (मगरमच्छ) के चंगुल से मुक्त कराकर मोक्ष प्रदान किया था। इसके निकट ही सबलपुर में गंगा-गंडक का पवित्र संगम है, जिसकी महत्ता प्रयागराज के समान पूजनीय मानी जाती है। यहां बिना किसी भेदभाव के हर संप्रदाय को माननेवाले श्रद्धालू शीष नवाने आते हैं।

इतनी भारी लाखो की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए घाटों पर एसडीआरएफ की नावें और पर्याप्त पुलिस बल मुस्तैद रहा। मंदिर परिसरों में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही थी। भीषण गर्मी को देखते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा शरबत, शीतल पेयजल और चिकित्सा शिविरों की उत्तम व्यवस्था की गई थी।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *