रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे विवादों ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। झारखंड आंदोलनकारी एवं पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है।
आंदोलनकारी सूर्य सिंह बेसरा ने 31 जुलाई को कहा कि राज्य में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाएं लगातार विवादों के घेरे में रही हैं। प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा रद्द होने, नियुक्ति प्रक्रिया में विलंब और पारदर्शिता की कमी के कारण लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं का सरकार और भर्ती संस्थाओं से विश्वास उठता जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। बार-बार होने वाली अनियमितताओं से अभ्यर्थियों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया संचालित नहीं कर सकती, तो ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
बेसरा ने कहा कि झारखंड के युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं है और सरकार युवाओं के साथ न्याय करने में असफल रही है। ऐसी स्थिति में राज्य में संवैधानिक व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए तथा राष्ट्रपति शासन लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा योग्य अभ्यर्थियों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।
बेसरा ने कहा कि झारखंड का युवा अब अपने अधिकारों के लिए मुखर हो चुका है और सरकार को उनकी आवाज सुननी होगी। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई तो राज्यव्यापी जन आंदोलन और तेज होगा।
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