परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, 50 लाख मुआवजा व् एक को नौकरी की मांग
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। सदर अस्पताल बोकारो के फिजियोथैरेपिस्ट बीरेंद्र महतो की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद 31 जुलाई को अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। परिजनों ने मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए इसे हत्या करार दिया और शव उठाने तथा पोस्टमार्टम कराने से साफ मना कर दिया। इसके चलते सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा भी प्रभावित रही और पूरे अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तथा दंडाधिकारियों की तैनाती करनी पड़ी।
इस अवसर पर मृतक की पत्नी उर्मिला देवी ने आरोप लगाया कि उनके पति ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उनकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा 50 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा नहीं होती, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से मामले की जांच एसआईटी से कराने की बात कही गई, जबकि पोस्टमार्टम निष्पक्ष ढंग से कराने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। इसके बाद भी देर शाम तक परिजनों की सहमति नहीं मिलने के कारण पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो सका।
घटना की जानकारी मिलते ही गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, आजसू पार्टी के बोकारो जिलाध्यक्ष सचिन महतो समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस अवसर पर पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि बीरेंद्र महतो की मौत अत्यंत दु:खद और रहस्यमय है। यदि परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं तो उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार की सभी बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए। परिवार को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मृतक के आश्रितों को समुचित आर्थिक सहायता, रोजगार और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। कहा कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होने से ही आम जनों का कानून और प्रशासन पर विश्वास कायम रहेगा।
उक्त घटना को लेकर सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन लगातार परिजनों से वार्ता कर रहा है। उन्होंने बताया कि परिवार के एक सदस्य को गैर-सरकारी स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन 50 लाख रुपये मुआवजा देने का अधिकार उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञात हो कि जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच देर शाम तक त्रिपक्षीय वार्ता जारी रही, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी और शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। पूरे मामले पर जिले भर की निगाहें टिकी है।
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