अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही और आदेश की अवहेलना करने वाले पंचायत सचिवों के खिलाफ सारण जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सह प्रधान जनगणना अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कर्तव्य में कोताही बरतने के आरोप में जिले के 106 पंचायत सचिवों पर ₹1,000 का अर्थदंड लगाया है। इसमें सोनपुर के भी सात पंचायत सचिव शामिल हैं।
जिलाधिकारी श्रीवास्तव ने सख्त निर्देश दिया है कि जुर्माने की यह राशि संबंधित पंचायत सचिवों के वेतन से काटी जाएगी और इस दंडात्मक कार्रवाई को उनकी सेवा पुस्तिका में भी दर्ज किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बीते 6 मई को ही इन सभी पंचायत सेवकों को कारण बताओ नोटिस (स्पष्टीकरण) जारी किया गया था। संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) के माध्यम से 24 घंटे के भीतर इसका जवाब मांगा गया था। जिला पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा सौंपे गए तामिला प्रतिवेदन से स्पष्ट कहा गया कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी किसी भी पंचायत सेवक ने न तो कार्य में योगदान दिया और न ही स्पष्टीकरण का कोई जवाब दिया। जिलाधिकारी ने इसे सरकारी कार्य में बाधा और आदेश की खुली अवहेलना मानते हुए जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 (क-क) के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
गौरतलब है कि जनगणना अधिनियम की इस धारा के तहत ₹1,000 के जुर्माने के साथ-साथ अधिकतम तीन वर्ष के कारावास का भी प्रावधान है। इस कार्रवाई की जद में सोनपुर अनुमंडल के तीन प्रखंडों (सोनपुर के 7, दरियापुर के 9 और दिघवारा के 5) समेत जिले भर के कुल 106 पंचायत सचिव आए हैं। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना राष्ट्रीय स्तर का अति महत्वपूर्ण और सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य है। इसमें किसी भी तरह की ढिलाई या कोताही को राष्ट्रहित की अवहेलना और गंभीर अपराध माना जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी अधिकारी या कर्मी ने इस कार्य में लापरवाही बरती, तो उनके विरुद्ध इससे भी अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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