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दुर्गा पहाड़ी में 25 साल पुराने सपने को पूरा करने 12 टोलों के ग्रामीणों ने संभाली कमान

जोश व् उत्साहपूर्वक रहिवासियों द्वारा श्रमदान से सीढ़ी निर्माण शुरू

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। सरकारी पहल का इंतजार करते-करते करीब ढाई दशक बीत गए, लेकिन बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के दुर्गापुर पंचायत के दुर्गा पहाड़ी तक पहुंचने के लिए सीढ़ी निर्माण का वर्षों पुराना सपना पूरा नहीं हो सका। अब दुर्गापुर के ग्रामीणों ने खुद इस सपने को साकार करने का बीड़ा उठाया है।

जानकारी के अनुसार इसे लेकर 4 अक्टूबर को दुर्गा पहाड़ी पर पूजा-अर्चना के बाद श्रमदान से सीढ़ी निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। दुर्गापुर के सभी 12 टोलों से महिला-पुरुष रहिवासी बड़ी संख्या में पहाड़ी पर पहुंचे। किसी ने ईंट पहुंचाई तो किसी ने बालू, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री ढोकर निर्माण स्थल तक पहुंचाई।

रहिवासी पाहन बोधन राम मांझी और गांव के बुजुर्गों की मौजूदगी में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद नारियल फोड़कर सीढ़ी निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके बाद ग्रामीण फावड़ा-कुदाल लेकर निर्माण कार्य में जुट गए। पहाड़ी पर ही खिचड़ी तैयार की गई और श्रमदान में शामिल ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भोजन किया।

यह अभियान जोहार बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ सेवा-सुसार समिति दुर्गापुर के नेतृत्व में शुरू किया गया है। समिति ने तय किया है कि प्रत्येक रविवार को ग्रामीण सामूहिक श्रमदान करेंगे, जबकि सप्ताह के बाकी दिनों में निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई जाएगी। दुर्गापुर पंचायत के स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2001 में तत्कालीन बोकारो जिला उपायुक्त विमल कीर्ति सिंह के कार्यकाल में स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर दुर्गा पहाड़ी के विकास की योजना स्वीकृत हुई थी। योजना में पहाड़ी तक सीढ़ी, सड़क, शेड और विश्राम गृह बनाने का प्रस्ताव था।

राशि आवंटित होने के बाद एक एनजीओ के माध्यम से काम शुरू कराने की पहल हुई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका। बाद में राशि सरेंडर हो गई और योजना अधूरी रह गई। 25 वर्षों तक इंतजार के बाद लगभग चार वर्ष पहले ग्रामीणों ने अपने स्तर से सीढ़ी निर्माण का विचार आगे बढ़ाया। अब सरकारी पहल की प्रतीक्षा करने के बजाय ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से निर्माण पूरा करने का निर्णय लिया है।

बताया जाता है कि सीढ़ी निर्माण शुरू होने से पहले बीते 2 और 3 अक्टूबर को ग्रामीण घर-घर पहुंचे और मुट्ठी चावल व दाल एकत्र किया। इन्हीं सामग्रियों से पहाड़ी पर खिचड़ी तैयार की गई। सामूहिक भोजन के बाद महिला-पुरुष फिर निर्माण कार्य में जुट गए। पंचायत के मुखिया सह समिति अध्यक्ष अमरेश कुमार महतो ने कहा कि सीढ़ी निर्माण ग्रामीणों के वर्षों पुराने संकल्प से जुड़ा है। अब सभी के सहयोग से इसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

उप मुखिया सह कोषाध्यक्ष पंचानन महतो ने बताया कि छह दिन संसाधन जुटाने और प्रत्येक रविवार को सामूहिक श्रमदान की व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। सचिव पाहन बोधन राम मांझी ने कहा कि पूजा-अर्चना के बाद निर्माण की शुरुआत ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। कहा कि सभी के सहयोग से कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। उपाध्यक्ष कपिलेश्वर महतो ने कहा कि सीढ़ी बनने से श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और महिलाओं को पहाड़ी तक पहुंचने में काफी सुविधा होगी। मीडिया प्रभारी संदीप कुमार महतो ने कहा कि दुर्गा पहाड़ी के विकास से क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

पंसस पति सनातन महतो ने कहा कि वर्षों से लंबित कार्य को अब ग्रामीणों ने खुद पूरा करने की जिम्मेदारी उठाई है। यह ग्रामीणों की एकजुटता का परिणाम है। डॉ अखिलेश्वर महतो ने कहा कि ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। सीढ़ी निर्माण पूरा होने से श्रद्धालुओं के साथ अन्य राहगीरों को भी सुविधा मिलेगी। ग्रामीण रहिवासी भुनेश्वर महतो, सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर ने कहा कि दुर्गा पहाड़ी के विकास की चर्चा वर्षों से होती रही है।

अब ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर काम शुरू किया है। मिथिलेश महतो ने कहा कि पहाड़ी तक निर्माण सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सभी ग्रामीण मिलकर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वंशीधर महतो ने कहा कि 12 टोलों के रहिवासियों का एक साथ इस पुनीत कार्य से जुड़ना अभियान की मजबूती को दर्शाता है। सभी का प्रयास है कि काम अधूरा न रहे। शुकदेव महतो ने कहा कि सीढ़ी बनने से श्रद्धालुओं और बुजुर्गों को पहाड़ी पर चढ़ने में सहूलियत होगी। नागेश्वर महतो ने कहा कि सीढ़ी निर्माण के बाद पहाड़ी के अन्य विकास कार्यों की दिशा में भी पहल होनी चाहिए।

रहिवासी सृष्टिधर महतो ने कहा कि दुर्गा पहाड़ी तक सीढ़ी निर्माण का सपना लंबे समय से ग्रामीणों के मन में था। अब सभी 12 टोलों के रहिवासी एकजुट होकर श्रमदान कर रहे हैं। ग्रामीणों का प्रयास है कि निर्माण कार्य लगातार जारी रहे और सीढ़ी का काम पूरा हो। फुलेश्वर महतो ने कहा कि पहाड़ी पर पहुंचने में श्रद्धालुओं और बुजुर्गों को परेशानी होती है। सीढ़ी बन जाने से सुविधा मिलेगी। ग्रामीण श्रमदान के साथ निर्माण सामग्री जुटाने में भी सहयोग कर रहे हैं।

सीढ़ी निर्माण अभियान में महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। पबिता देवी ने कहा कि दुर्गा पहाड़ी गांव की आस्था से जुड़ी है और सीढ़ी बनने से महिलाओं को भी पहाड़ी पर जाने में सुविधा होगी। रंजू देवी ने कहा कि पहाड़ी पर चढ़ने में महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है। सीढ़ी बनने के बाद यह समस्या कम होगी। संजू देवी ने कहा कि ग्रामीणों की एकजुटता से शुरू हुआ यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी होगा। गुलाबी देवी ने कहा कि महिला-पुरुष सभी मिलकर काम कर रहे हैं। सामूहिक श्रमदान से निर्माण कार्य पूरा करने का संकल्प लिया गया है। विनीता देवी ने कहा कि पहाड़ी तक पहुंचने में होने वाली परेशानी को देखते हुए सीढ़ी निर्माण जरूरी था। ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी उठाई है।

मौके पर मालती देवी, रिंकी देवी, सुषमा देवी (मेट), हेमंती देवी, लक्ष्मी कुमारी, अनिता देवी, चुनरी देवी और मुन्नी देवी समेत अन्य महिलाओं ने भी श्रमदान और निर्माण सामग्री पहुंचाने में सहयोग किया। इस अवसर पर कपिलेश्वर महतो, संदीप कुमार महतो, सनातन महतो, भुनेश्वर महतो, मिथिलेश महतो, वंशीधर महतो, अखिलेश्वर महतो, शुकदेव महतो, नागेश्वर महतो, सुनील महतो, दिगंबर महतो, बानेश्वर महतो, धनेश्वर महतो, सरजू महतो, परमेश्वर महतो, लालकिशोर महतो, राजेश महतो, महेंद्र महतो, आनंद महतो, फुलेश्वर महतो, अर्जुन महतो, जवाहर लाल महतो, गुलाबी देवी, विनीता देवी, रिंकी देवी, लक्ष्मी कुमारी, अनिता देवी, चुनरी देवी मुन्नी देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

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