प्रहरी संवाददाता/बोकारो। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर मनाए जाने वाले जितिया पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। उक्त विचार *जगत प्रहरी* के कसमार संवाददाता रंजन वर्मा के है।
वर्मा के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से प्रसिद्ध इस पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पर्व के नजदीक आते ही बाजारों में पूजन सामग्री, फल, मिठाई और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है।
जितिया पर्व मातृत्व के प्रेम, त्याग और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और उसके सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार कई महिलाएं इस दौरान निर्जला व्रत करती हैं। व्रत के दौरान अन्न-जल का त्याग कर महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं और संतान के कल्याण की कामना करती हैं।
अष्टमी तिथि को रखा जाता है व्रत। जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र और परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग तरीके से किए जाते हैं। व्रती महिलाएं स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारी करती हैं और विधि-विधान से जीवित्पुत्रिका व्रत का पालन करती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजन करने की परंपरा है।
व्रत से पहले और बाद की भी होती है विशेष परंपरा
जितिया पर्व में व्रत के साथ कई पारंपरिक रस्मों का महत्व है। व्रत से पहले महिलाएं निर्धारित परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण करती हैं। इसके बाद अष्टमी तिथि को व्रत रखा जाता है। अगले दिन पारण के साथ व्रत पूरा किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इन परंपराओं के पालन में कुछ अंतर देखने को मिलता है। उक्त पर्व को लेकर कसमार तथा आसपास के बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। फल, सब्जी, पूजन सामग्री, मिठाई, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान की दुकानों पर खरीदार पहुंच रहे हैं। दुकानदारों को पर्व के दौरान कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं और परिवार के सदस्य पर्व की आवश्यक तैयारियों में जुटे हैं।
जितिया पर्व को लेकर घरों में साफ-सफाई और पूजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महिलाएं व्रत से संबंधित सामग्री जुटाने में लगी हैं। कई जगहों पर महिलाएं समूह में एकत्र होकर व्रत की कथा और पूजा की तैयारी करती हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी व्रत रखने वाली महिलाओं की सुविधा का ध्यान रखते हैं।
लोक आस्था और पारिवारिक भावना से जुड़ा पर्व
जितिया केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि लोक आस्था और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व भी है। विशेष रूप से माताओं के लिए यह पर्व संतान के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को अभिव्यक्त करने का अवसर माना जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के कारण बच्चों और युवाओं को भी इस पर्व के माध्यम से अपनी लोक-संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। जितिया व्रत से जुड़ी धार्मिक कथाओं का भी विशेष महत्व है। व्रत रखने वाली महिलाएं परंपरा के अनुसार कथा सुनती हैं और संतान की रक्षा तथा दीर्घायु की कामना करती हैं। व्रत की कथा और पूजा-पद्धति में स्थानीय परंपराओं के अनुसार भिन्नता भी देखने को मिलती है। पर्व को लेकर क्षेत्र की महिलाओं में खासा उत्साह है। व्रत रखने वाली महिलाओं का कहना है कि जितिया उनके लिए आस्था और भावनाओं से जुड़ा पर्व है। संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना से वे हर वर्ष श्रद्धा के साथ व्रत करती हैं। परिवार के सदस्य भी व्रत की तैयारियों में सहयोग करते हैं।
जितिया पर्व के कारण धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। पर्व के माध्यम से परिवार और समाज में आपसी सहयोग, प्रेम और पारंपरिक मूल्यों की भावना मजबूत होती है। आने वाली पीढ़ियों तक इन लोक परंपराओं को पहुंचाने में भी ऐसे पर्वों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
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