झारखंड के कारो व् दक्षिण कोयल नदी में घुला जहरीला पानी, दर्जनों मवेशियों की मौत
प्रहरी संवाददाता/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड के पड़ोसी राज्य ओडिशा स्थित रुंगटा कामंडा प्लांट में एक भीषण हादसा सामने आया है, जहाँ केमिकल/स्लरी टैंक फटने से 12 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी का असर केवल प्लांट तक सीमित नहीं रहा। प्लांट से निकले अत्यधिक जहरीले काले-लाल पानी के कारो और दक्षिण कोयल नदी में समाहित होने से ओडिशा और झारखंड के दर्जनों गाँवों में भारी तबाही मची है।
बताया जाता है कि जहरीले पानी के प्रभाव से नदियों और स्थानीय जलाशयों में बड़ी संख्या में मछलियाँ मरकर तैरने लगी हैं, जबकि नदी का पानी पीने से कई मवेशियों की भी मौत की खबर है। इस गंभीर मानवीय और पर्यावरणीय संकट को देखते हुए आजसू पार्टी के केंद्रीय सदस्य समीर शेख ने सुंदरगढ़ और आसपास के प्रभावित खनन व ग्रामीण क्षेत्रों का 30 सितंबर को दौरा किया। साथ हीं उन्होंने क्षेत्र की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया।
सुंदरगढ़ और सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों एवं आजसू कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित आपातकालीन बैठक में समीर शेख ने ओडिशा प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया। इस अवसर पर आजसू नेता ने कहा कि यह महज कोई हादसा नहीं, बल्कि ओडिशा प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की घोर लापरवाही से हुई आपराधिक हत्या है। कहा कि एक तरफ जहाँ सरकार की विफलता के कारण ग्रामीण पहले से जल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रुंगटा कामंडा प्लांट से निकलने वाला जहरीला काला पानी कारो और कोयल नदी में बहाकर हजारों ग्रामीणों के जीवन को खतरे में डाल दिया गया है। इन नदियों पर दर्जनों गाँवों की जिंदगी, खेती और मवेशी निर्भर हैं। अब यह लापरवाही और बर्दाश्त नहीं होगी।
शेख ने स्पष्ट किया कि इस घटना की जवाबदेही तय करने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक में सर्वसम्मति से कई निर्णय लिया गया। जिसमें उक्त घटना की उच्चस्तरीय जांच की माँग की गयी। घटना की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए सुंदरगढ़ और केन्दूझर के जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की जाएगी। ओडिशा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ प्रशासनिक निष्क्रियता का मामला दर्ज कराने की चेतावनी दी गई।

घटना में मृतक श्रमिकों के परिवारों को उचित मुआवजा, आश्रितों को नियोजन तथा प्रभावित ग्रामीणों व पशुपालकों के नुकसान की तुरंत भरपाई करने की माँग उठाई गई। साथ हीं
सड़क से सदन तक संघर्ष की चेतावनी दी गयी। बैठक में भारी संख्या में मौजूद स्थानीय ग्रामीण संघ के प्रतिनिधियों और आजसू कार्यकर्ताओं ने समीर शेख के नेतृत्व में एकजुट होकर आंदोलन का बिगुल फूँका। शेख ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए और कारो-कोयल नदी के प्रदूषण को रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो ओडिशा और झारखंड के प्रभावित ग्रामीण मिलकर विशाल जनांदोलन खड़ा करेंगे। उक्त आपातकालीन बैठक में ओडिशा एवं झारखंड के कई वरिष्ठ आजसू कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।
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